“भक्ति-लता संतों की कृपा से ही उत्पन्न होती है। दीनता एवं दूसरों को मान देने की वृत्ति आदि शिलाओं की बाढ़ द्वारा उस लता को संतापराध रूपी हाथी से बचाकर, श्रवण-कीर्तन आदि जल से सींचते और बढ़ाते रहना चाहिए।”
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विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर — सूक्ति व विचार
विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।