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शंकुक — सूक्ति व विचार

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“जिस प्रकार बिना प्राण का शरीर काठ के समान लगता है, उसी प्रकार मैं असाधारण चेष्टाओं और कर्त्तव्यों से शून्य जीवन को भी मानता हूँ।”

— शंकुक

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