विचारघर

विचारघर › संस्कृत व प्राचीन साहित्य › रूप गोस्वामी

रूप गोस्वामी — सूक्ति व विचार

रूप गोस्वामी के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। रूप गोस्वामी के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“पृथ्वी पर भारत उत्तम है, उसमें भी मधुपुरी सुंदर है, उसमें वृंदावन श्रेष्ठ है और उसमें भी रासस्थली यमुना का किनारा उत्तम है।”

— रूप गोस्वामी

“जब तक भोग और मोक्ष की वासना रूपिणी पिशाची हृदय में बसती है, तब तक उसमें भक्ति-रस का आविर्भाव कैसे हो सकता है।”

— रूप गोस्वामी

“स्वभाव से भी धीर व्यक्ति कभी समय के अनुरोध से विकार धारण करते हैं।”

— रूप गोस्वामी

“अंतःकरण को अत्यंत द्रवीभूत कर देनेवाले और बछड़े अत्यधिक ममता से युक्त सांद्र भाव को ही विद्वान् लोग 'प्रेम कहते हैं।”

— रूप गोस्वामी

“मंत्र का मंद स्वर से उच्चारण करना 'जप' कहलाता”

— रूप गोस्वामी

संस्कृत व प्राचीन साहित्य के अन्य रचनाकार