“हे स्वामी! तुमने घी का व्यापार तो किया, किंतु खाया तेल ही है।”
विचारघर › संस्कृत व प्राचीन साहित्य › नरपति नाल्ह
नरपति नाल्ह — सूक्ति व विचार
नरपति नाल्ह के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। नरपति नाल्ह के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।
“पुरुष के समान निर्गुणी संसार में अन्य नहीं होता।”
“हे स्वामी! प्रवास के लिए कौन कहता है? वह जिसके घर में स्त्री नहीं होती या जिसके घर में कुल्हड़ में नमक तक नहीं होता, या जिसके घर में अकुलीन स्त्री कलह करती है, या जिसको ऋण से दबा होने से घर नहीं सुहाता, या जो योगी होकर घर से निकल पड़ता है, या जो अपना सा मुँह लेकर अलग (प्रवास) को जाता है।”
“अर्थ और द्रव्य तो धरती में गड़ा रह जाता है, जो इसका संचय करता है, यह उसी को खाता है।”