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मनु — सूक्ति व विचार

मनु के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। मनु के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“जिस कुल में पति पत्नी से और पत्नी पति से संतुष्ट रहती है, वहाँ ध्रुव कल्याण वास करता हैं।”

— मनु

“देवों के समक्ष की हुई प्रतिज्ञा के द्वारा पुरुष स्त्री के साथ विवाह करता है, स्वेच्छा से नहीं। अतएव देवों की प्रीति के लिए स्त्री का नित्य भरण पोषण करना चाहिए।”

— मनु

“स्त्री की प्रसन्नता से सारा परिवार प्रसन्न रहता है। उसके असंतोष से कुछ भी अच्छा नहीं लगता।”

— मनु

“अनेक कल्याणों की भाजन स्त्रियाँ पूजा के योग्य है, ये घर की ज्योति हैं, प्रजापति ने प्रजोत्पत्ति के लिए उन्हें बनाया है। स्त्रियाँ घरों में साक्षात् लक्ष्मी है, दोनों में कोई अंतर नहीं है।”

— मनु

“जो पुरुष यत्नपूर्व स्त्री की रक्षा करता है, वह अपनी संतान, चरित्र, परिवार, धर्म और अपने आपकी रक्षा करता है।”

— मनु

“जहाँ स्त्रियों का पूजन होता है, वहाँ देवता बसते हैं। जहाँ इनका आदर नहीं होता, वहाँ सब क्रियाएँ निष्फल जाती है।”

— मनु

“संतति को जन्म देना, उत्पन्न हुए पुत्रादिक का पालन करना, और प्रतिदिन की लोकयात्रा (भोजन आदि का प्रबंध) का एकमात्र प्रत्यक्ष कारण स्त्री ही है।”

— मनु

“अपत्य, धर्मकार्य, उत्तम आनंद और अपनी तथा अपने पूर्व पुरुषों की स्वर्गगति—सब कुछ स्त्री के अधीन है।”

— मनु

“मन, वाणी और शरीर से संयत रहकर जो स्त्री पति के अनुकूल रहती है, वह इस लोक में साध्वी स्त्रियों का यश पाती है और मरने के उपरांत पति लोक में जाती है।”

— मनु

“स्त्रियों के लिए पृथक् यज्ञ, व्रत या उपवास का विधान नहीं है। पति को शुश्रूषा से ही वे स्वर्ग में उच्च स्थान पाती है।”

— मनु

“मंत्र के साथ होने वाले संस्कार से प्राप्त हुआ पति, इस लोक में और परलोक में भी स्त्री को नित्य सुख का देनेवाला है।”

— मनु

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