“भगवान् स्वयं परमानंद-स्वरूप हैं अतः जब वे मन में प्रवेश कर जाते हैं, तब वह मन पूर्ण रूप से भगवान् के आकार का होकर रसमय बन जाता है।”
विचारघर › संस्कृत व प्राचीन साहित्य › मधुसूदन सरस्वती
मधुसूदन सरस्वती — सूक्ति व विचार
मधुसूदन सरस्वती के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। मधुसूदन सरस्वती के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।
“भगवान श्रीकृष्ण को छोड़ कर अन्य किसी भी तत्त्व को मैं नहीं जानता।”