“जो शरीरधारियों को अकाल मृत्यु से बचाकर शरीर सुख देता है, उस परमात्मा के समान भी कोई नहीं है, फिर उससे श्रेष्ठ कैसे हो सकता है क्योंकि इस संसार में जीवन दान से बढ़कर कुछ भी नहीं है।”
— कणाद
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“जो शरीरधारियों को अकाल मृत्यु से बचाकर शरीर सुख देता है, उस परमात्मा के समान भी कोई नहीं है, फिर उससे श्रेष्ठ कैसे हो सकता है क्योंकि इस संसार में जीवन दान से बढ़कर कुछ भी नहीं है।”
— कणाद