“यद्यपि सब कर्म देवाधीन है, तथापि मनुष्य को अपना कार्य करना ही चाहिए।”
— धनपाल
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“यद्यपि सब कर्म देवाधीन है, तथापि मनुष्य को अपना कार्य करना ही चाहिए।”
— धनपाल
“जो जैसा देता है, वैसा ही पाता है, यह शिष्ट लोगों ने सच कहा है जो माली कोदों बोएगा, वह धान कहाँ से प्राप्त करेगा?”
— धनपाल
“क्या पृथ्वी पर वे भी 'कवि' कहे जाएँगे जिसके कथन मनुष्य' को मस्त न कर दें?”
— धनपाल
“मुनि वैभव संपन्न नहीं होता।”
— धनपाल