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दण्डी — सूक्ति व विचार

दण्डी के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। दण्डी के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“कठिन कार्य का साधन बुद्धि है।”

— दण्डी

“अन्यायपूर्वक दिए गए दंड ने भय और क्रोध को जन्म दिया।”

— दण्डी

“राजनीति और श्रेष्ठ कर्मों के आरंभ के मूल में धन ही होता है।”

— दण्डी

“ईश्वरीय शक्ति के सम्मुख मानवी शक्ति बली नहीं है।”

— दण्डी

“निश्चय ही इस संसार में इच्छारहित प्राणी को संपदाएँ नहीं अपनाती और संपूर्ण कल्याणों की उपस्थिति उनके हाथ में नित्य रहती है जो आलसी नहीं हैं।”

— दण्डी

“मनुष्यों में अनभ्यास से विद्या का, असंसर्ग से बुद्धिमानों का तथा अनिग्रह से इंद्रियों का विनाश हो जाता है।”

— दण्डी

“आज्ञा का उल्लंघन करने वाली प्रजा जो मन में आता है, बोलती है और जो मन में आता है, करती है तथा इस प्रकार सभी मर्यादाओं को अस्त-व्यस्त कर देती है। मर्यादारहित समाज इस लोक और परलोक से स्वामी और स्वयं को गिरा देता है।”

— दण्डी

“गृही के प्रिय और हित के लिए पत्नी के गुण होते हैं।”

— दण्डी

“न धन संचय किया, न विद्या का ही अर्जन किया, न कुछ तप ही संचित किया, और सारी आयु व्यर्थ ही बीत गई।”

— दण्डी

“अवज्ञा जिसकी बहिन है, वह है दारिद्र्य।”

— दण्डी

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