“ज्ञान की प्रथम गुरु माता है। कर्म का प्रथम गुरु पिता है। प्रेम का प्रथम गुरु स्त्री है और कर्त्तव्य का प्रथम गुरु संतान है।”
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चतुरसेन शास्त्री — सूक्ति व विचार
चतुरसेन शास्त्री के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। चतुरसेन शास्त्री के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।