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भट्टनारायण — सूक्ति व विचार

भट्टनारायण के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। भट्टनारायण के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“ओह, स्त्रियों का कैसा भोलापन!”

— भट्टनारायण

“यदि युद्ध को छोड़ने पर मृत्यु का भय न हो तब तो अन्यत्र भाग जाना उचित है। किंतु प्राणी की मृत्यु अवश्य ही होती है। तो फिर यश को व्यर्थ क्यों कलंकित कर रहे हो?”

— भट्टनारायण

“भीष्म समाप्त हो गए, द्रोण मारे गए, कर्ण का भी नाश हो गया। अब पांडवों को शल्य जीत लेगा ऐसी आशा है। हे राजन्! आशा बड़ी बलवती होती है।”

— भट्टनारायण

“तेजस्वी पुरुष सशस्त्र भुजा रूपी डोंगी से शत्रु द्वारा मारे गए कुटुंब के दुःखरूपी सागर को पार करता है।”

— भट्टनारायण

“उपकार्य के अभाव में उपकारी सामग्री से क्या लाभ?”

— भट्टनारायण

“मनुष्य दीनतारहित होकर और रोगरहित होकर पुरुष की पूर्ण आयु तक जिए।”

— भट्टनारायण

“वीर क्षत्रिय को अपनी प्रतिज्ञा शिथिल करना ठीक नहीं है।”

— भट्टनारायण

“महापराक्रमी का, कारण के बिना भी डरा हुआ चित्त विचार करने में शिथिल हो जाता है।”

— भट्टनारायण

“घड़े के कुएं में गिर जाने पर रस्सी को भी वही नहीं फेंक देना चाहिए।”

— भट्टनारायण

“सोता हुआ व्यक्ति क्या नहीं देखता है?”

— भट्टनारायण

“स्त्रियों के चित्त साथ में रहने के कारण पति के सदृश ही हो जाते हैं।”

— भट्टनारायण

“उच्च या नीच कुल में जन्म होना भाग्य के अधीन है। मेरे अधीन तो पुरुषार्थ है।”

— भट्टनारायण

“शत्रु की सेना में सावधान होकर विचरण करना चाहिए।”

— भट्टनारायण

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