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भट्ट मथुरानाथ शास्त्री — सूक्ति व विचार

भट्ट मथुरानाथ शास्त्री के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। भट्ट मथुरानाथ शास्त्री के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“हे भगवान! 'मैं आपका सेवक हूँ' यह कैसे कह सकता हूँ? 'मैं आपकी शरण हूँ' यह कहने का भी मेरा भाग्य कहाँ! 'मैं दीन और दुर्दशाग्रस्त हूँ' यह आप दयानिधि से कहने की क्या आवश्यकता? 'आपके नाम स्मरण का मुझे आसरा है, यह भी कहने का मेरा समय नहीं। मैं पापी इस स्थिति में किस साहस पर दया की याचना करूँ? 'अजामिल आदि पापियों की भाँति मेरी भी रक्षा कीजिए' यह कहने का भी क्या मेरा भाग्य है? हे दयालु! आपकी दृष्टि को पाने के लिए मैं क्या निवेदन करूँ, यह तनिक आप ही बता दीजिए।”

— भट्ट मथुरानाथ शास्त्री

“हरि नाम को ही सर्वस्व मानने वाली जिह्वा ही जिह्वा है। अन्य जिह्वाएँ तो व्यर्थ ही बोलने वाली हैं।”

— भट्ट मथुरानाथ शास्त्री

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