“जीवन भर काँटे की तरह क्या चुभता है? छिप कर किया गया पाप।”
— अमोघवर्ष
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“जीवन भर काँटे की तरह क्या चुभता है? छिप कर किया गया पाप।”
— अमोघवर्ष
“दरिद्रता क्या है? असंतोष ही। लघुता क्या है? याचना।”
— अमोघवर्ष