“तीर्थंकरों ने जो कुछ देने योग्य था, वह दे दिया है, वह समग्र दान यही है—दर्शन, ज्ञान और चरित्र का उपदेश।”
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आचार्य भद्रबाहु — सूक्ति व विचार
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