“स्मृति अतीत-विषयक होती है। मति भविष्य-विषयक होती है। बुद्धि वर्तमान विषयक होती है। प्रज्ञा त्रिकाल-विषयक होती है। नवनवोन्मेषशालिनी प्रज्ञा को प्रतिभा कहते हैं।”
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अभिनवगुप्त — सूक्ति व विचार
अभिनवगुप्त के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। अभिनवगुप्त के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।
“विश्व रूप वृक्ष के बीज के उत्पन्न होने के लिए मूल आधार रूप से स्थित और धारण करने की शक्ति से युक्त पृथ्वी रूप परमेश्वर को मैं नमस्कार करता हूँ।”
“अपूर्व वस्तु के निर्माण में समर्थ प्रज्ञा को प्रतिभा कहते हैं।”
“अतः हमने प्राचीन सज्जन आचार्यों के मतों का खंडन नहीं किया है अपितु संशोधन किया है क्योंकि पूर्व आचायों द्वारा स्थापित सिद्धांतों की भली प्रकार संगति लगा देने में मौलिक सिद्धांतों की स्थापना का सही फल मिलता है।”