विचारघर

विचारघर › दार्शनिक व विचारक › शंकर शैलेंद्र

शंकर शैलेंद्र — सूक्ति व विचार

शंकर शैलेंद्र के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। शंकर शैलेंद्र के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“अत्यधिक दुःखी लोग गलती से काव्य-क्षेत्र में आ जाते हैं। जो वे गीतों में सिखाते हैं, उसे वे दुःखों में सीखते हैं।”

— शंकर शैलेंद्र

“कल्पना की तुलना में बुद्धि इसी प्रकार है जैसे कर्ता की तुलना में उपकरण, आत्मा की तुलना में शरीर और वस्तु की तुलना में उसकी छाया।”

— शंकर शैलेंद्र

“यदि शीत ऋतु आ गयी है, तो क्या वसंत ऋतु अधिक दूर हो सकती है?”

— शंकर शैलेंद्र

“हम भूत और भविष्य को देखते हैं और जो नहीं है उसकी कामना करते हैं। हमारा निष्कपट हास्य भी किसी वेदना से युक्त होता है।”

— शंकर शैलेंद्र

“हमारे मधुरतम गीत वे ही होते हैं जो अधिकतम विषादयुक्त विचार व्यक्त करते हैं।”

— शंकर शैलेंद्र

“एक ही नित्य रहता है, अनेक तो परिवर्तित होते हैं और चले जाते हैं। स्वर्गीय प्रकाश नित्य चमकता है, पृथ्वी की छायाएँ उड़ जाती हैं। बहुरंगी शीशे के गुंबद के समान जीवन शाश्वत के शुभ्र प्रकाश को रंग-बिरंगा कर देता है।”

— शंकर शैलेंद्र

“ख़ेद है कि न तो मेरे पास आशा है, न स्वास्थ्य, न आंतरिक शांति, न बाह्य शांति और न ही सब धनों से श्रेष्ठ संतोष, जो कि संत ध्यान में पा लेता है और आंतरिक गौरव का मुकुट धारे भ्रमण करता है।”

— शंकर शैलेंद्र

दार्शनिक व विचारक के अन्य रचनाकार