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राम कृष्ण परमहंस — सूक्ति व विचार

राम कृष्ण परमहंस के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। राम कृष्ण परमहंस के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“पहले ईश्वर-प्राप्ति करो, उसके उपरांत गृहस्थाश्रम में भी रहा जा सकता है। गार्हस्थ्य जीवन की गंध लग जाने पर ईश्वर प्राप्ति कठिन हो जाती है।”

— राम कृष्ण परमहंस

“प्रत्येक धर्म ईश्वर की प्राप्ति ही सिखाता है। ईश्वर-प्राप्ति से ही मानव की समस्याओं का अंत हो सकता है।”

— राम कृष्ण परमहंस

“संसार में रहते हुए मनुष्य को सदैव ईश्वर का चिंतन करना चाहिए, जैसे दासी दूसरे के घर का काम करते हुए भी, बराबर अपने बच्चों का ध्यान रखती है।”

— राम कृष्ण परमहंस

“जैसे-जैसे मनुष्य ईश्वर की ओर बढ़ता है, वैसे-वैसे उसे विषयों से विराग होने लगता है और यह अनुभव होता है कि जो कुछ करता है, ईश्वर ही करता है।”

— राम कृष्ण परमहंस

“जिस प्रकार हमें जगत् का अनुभव हो रहा हैं, उसी प्रकार ईश्वर का अनुभव हो सकता है।”

— राम कृष्ण परमहंस

“ईश्वर-भक्त अपने को दीन और तुच्छ समझता है, वह किसी से अभिमान नहीं करता।”

— राम कृष्ण परमहंस

“ईश्वर प्राप्ति के लिए एक ही उपाय है—पूर्ण श्रद्धा के साथ उसके लिए रोना। ईश्वर को अपना सगा समझ उससे कृपा की माँग करो।”

— राम कृष्ण परमहंस

“सच्ची निष्ठा होने पर ईश्वर सद्गुरु भेज देता है, तथा अन्य सुविधाएँ भी कर देता है।”

— राम कृष्ण परमहंस

“अज्ञानावस्था में ईश्वर का अस्तित्त्व नहीं मालूम पड़ता, किंतु इससे यह न कहो कि ईश्वर नहीं है।”

— राम कृष्ण परमहंस

“ईश्वर सत्य है। अतः ईश्वर की प्राप्ति के लिए पहले जीवन में सत्य की प्रतिष्ठा करनी होती है।”

— राम कृष्ण परमहंस

“मनुष्य जब तक ईश्वर प्राप्ति नहीं कर लेता, तब तक उसके दुःखों का अंत नहीं।”

— राम कृष्ण परमहंस

“अपने मत के लिए आग्रह न करो। ज्ञान की प्राप्ति केवल तर्क से नहीं होती।”

— राम कृष्ण परमहंस

“जब तक पूर्ण भक्ति का उदय न हो जाए, तब तक शास्त्र कथित नियमों के अनुसार जीवन यापन करना चाहिए।”

— राम कृष्ण परमहंस

“ईश्वर सगुण साकार और निर्गुण निराकार दोनों हैं। जब तक घंटी की आवाज़ सुनाई पड़ती है; तब तक वह साकार है, जब सुनाई नहीं पड़ती तब निराकार—ठीक इसी प्रकार ईश्वर का भी है।”

— राम कृष्ण परमहंस

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