“मनुष्य का अंतःकरण देववाणी है।”
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लॉर्ड बायरन — सूक्ति व विचार
लॉर्ड बायरन के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। लॉर्ड बायरन के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।
“हम बस इतना जानते हैं कि कुछ भी नहीं जाना जा सकता।”
“अपने प्रथम भावावेश में नारी अपने प्रेमी से प्रेम करती है किंतु अन्यों में वह केवल प्रेम से प्रेम करती है।”
“दुर्गम वनों में आनंद होता है और एकाकी समुद्र तट पर हर्षोन्माद। गहरे समुद्र के तट के जनशून्य स्थान में भी समाज होता है और सागर के गर्जन में संगीत। मैं मानव को कम प्रेम नहीं करता, पर प्रकृति को अधिक प्रेम करता हूँ।”
“आलोचना को छोड़कर हर व्यवसाय सीखने में मनुष्य को अपना समय लगाना चाहिए क्योंकि आलोचक तो सब बने बनाए ही हैं।”
“ओ नक्षत्रों! तुम जो आकाश की कविता हो!”
“न झुकने वाला व्यक्ति तड़प सकता है और विद्रोह कर सकता है, पश्चात्ताप तो निर्बल व्यक्ति करते हैं।”
“संवेदनशील बनो परंतु निर्मल भी। प्रेमी बनो परंतु पवित्र भी।”
“पुरुष का प्रेम उसके जीवन की एक वस्तु है, एक भाग है परंतु नारी के लिए उसका प्रेम उसका संपूर्ण जीवन है।”
“मित्रता प्रेम में पल्लवित हो सकती है और बहुधा हो हो जाती है, किंतु प्रेम कभी भी घटकर मित्रता में परिवर्तित नहीं होता।”
“कविता में प्रारंभ करने जैसा कठिन कुछ नहीं है—संभवतः उसके अंत को छोड़कर।”
“मित्रता प्रेम ही है परंतु पंखविहीन।”
“अपना नाम छपा हुआ देखना निश्चित ही सुखद होता है। पुस्तक तो पुस्तक ही है भले ही उसमें कुछ न हो।”
“प्रतिशोध मधुर होता है—विशेष रूप से स्त्रियों के लिए।”
“एक प्रातः मैं जागा ओर अपने को प्रसिद्ध पाया।”