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लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई — सूक्ति व विचार

लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“बड़े शहरों की जो बात मुझे सबसे ज़्यादा बुरी लगती है, वह यह कि वहाँ का कलाकार अपनी कला को बेचना चाहता है। उसके भीतर अपनी कला की रचना करने से ज़्यादा, बेचने का भाव भरा होता है।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“अब हम पुराने तरीके से लिखने की अपनी योग्यता को खो चुके हैं। अब हमें नयापन पसंद है। हम मानव जीवन को अभिव्यक्त करने के लिए नई विधाएँ और नई संभावनाओं को खोज रहे हैं।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“मनुष्यों को होने वाले अनुभव कभी नहीं बदलते। जवानी, बुढ़ापा और फिर एक दिन मृत्यु—ये सबकुछ सदियों के बाद भी नहीं बदला है। ये सारी चीजें ज्यों की त्यों हैं।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“मुझे वो उपन्यास पसंद नहीं, जिसका लेखक के वजूद से सीधा संबंध नहीं होता। मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता, लेकिन ये कवियों के साथ कुछ अलग होता है।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“फ़िल्मों में आपके पास इतनी गुंजाइश नहीं होती। आप कहानी से दूर नहीं जा सकते, आपको जो कहना है, कहानी के भीतर कहना है। किताब में आप कहानी के दो हिस्‍सों के बीच आसानी से अपनी बात कह सकते हैं, चिंतन कर सकते हैं।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“लंबे वाक्‍यों के पीछे एक कहानी है। जब मैंने लिखने की शुरुआत की, तो मुझे एकांत नहीं मिल पाता था। मैं हमेशा परिवार व भीड़ के बीच रहता था, अपने मन में लिखता रहता था। मैं आरंभ में एक वाक्‍य बनाता, फिर उस वाक्‍य में जोड़ता जाता—वह सबकुछ मैं याद रखता था। जब भी मौक़ा मिलता, मैं उन्‍हें लिखने बैठ जाता। इस तरह मेरी स्‍मृति से एक लंबा वाक्‍य निकल कर आ जाता। इस तरह मेरे वाक्‍यों की लंबाई बढ़ती गई।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“कुछ पाने के लिए आपको किसी खजाने को खोजने की जरूरत नहीं है। बस आपको लगातार खोजना है, सोचना है और ये छोटा काम नहीं है।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“ऐसा नहीं है कि मैं यह नहीं समझता कि एक व्यक्ति को मरना क्यों पड़ता है, बल्कि मैं यह नहीं समझ पाता कि एक व्यक्ति को जीना क्यों पड़ता है!”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“मैं कई बड़े सवालों को लेकर अब भी स्पष्ट नहीं हूँ, लेकिन ये मेरा काम नहीं है। मैं उपन्यासकार हूँ, दार्शनिक नहीं।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“लोग मेरी भाषा व वाक्‍यों पर अचरज जताते हैं, कई बार मेरा एक वाक्‍य बीस पेज लंबा होता है। मैंने अपनी हंगारी भाषा को इस तरह इस्‍तेमाल किया है कि उसे लोग ‘क्रास्ज़्नाहोरकाई हंगारी’ कहने लगे हैं। जब कोई इसे अँग्रेज़ी में अनुवाद करता है, तो उसे इसके लिए एक ख़ास किस्‍म की ‘क्रास्ज़्नाहोरकाई अँग्रेज़ी’ खोजनी पड़ती है।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“मेरा काम इतना है कि उन लोगों को समझने की कोशिश करना जो किसी चीज़ में विश्वास करते हैं। अपने आप में ये एक बड़ा काम है। उन लोगों को देखते हुए मैं ये गहराई तक महसूस करता हूँ कि मैं भी किसी चीज़ में विश्वास कर सकता हूँ, बल्कि उन लोगों के साथ एक जुड़ाव महसूस करता हूँ।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“काफ़्का के यहाँ पर हर वाक्य एक रहस्य है, इसलिए भी वहाँ पर वाक्य लंबे हैं। इस तरह के वाक्यों के लिए मैं रुकता हूँ और उन वाक्यों के बारे में लंबे समय तक सोचता हूँ।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“मैं जानता हूँ कि इस दुनिया में अब भी कुछ पवित्र और पाक लोग हैं। इन लोगों में मेरा विश्वास भी है, लेकिन इन लोगों के विश्वास में मेरा विश्वास नहीं है। मैं सिर्फ लोगों में विश्वास कर सकता हूँ—ये मेरी स्थिति है।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“जब मैं काफ़्का को नहीं पढ़ रहा होता हूँ, तब मैं काफ़्का के बारे में सोच रहा होता हूँ। जब मैं काफ़्का को नहीं सोच रहा होता हूँ, तब मैं काफ़्का के बारे में सोचने की स्मृति में होता हूँ। और कुछ देर तक उनके बारे में सोचना भूलने पर, मैं उन्हें फिर से निकालकर पढ़ने लगता हूँ—यह सिलसिला इसी तरह चलता रहता है।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“सवालों और जवाबों के बजाये मेरी दिलचस्पी इसमें ज़्यादा है कि मैं संशय की स्थिति में बना रहूँ। पिछले पाँच सालों से मेरा मुख्य काम यही रहा है कि मैं ख़ुद को संशय की स्थिति में रखूँ। किसी अंतिम निर्णय पर पहुँचने के बजाये अपने सवालों और जवाबों पर संशय करूँ।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“बुद्ध ने कहा है कि हमारे समझने के लिए कुछ भी नहीं है। इस तरह से कुछ मूलभूत चीज़ें कभी नहीं बदलती। मैं यहाँ पर मृत्यु के बारे में बात नहीं कर रहा, बल्कि मृत्यु के डर के बारे में बात कर रहा हूँ।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“अगर हम रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी एक घटना को ठीक से नहीं बता पाते तो हम पूरे ब्रह्मांड से जुड़े बड़े सवालों के बारे में इतनी आसानी से कैसे सोच सकते हैं?”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“हमारे लेखन में भी एक जिम्मेदारी होती है। हम एक पतली रेखा खींचते है। जीवन की कई सारी चीज़ों को लेकर हम लाचार होते हैं, चाहे वो कला, संस्कृति या विज्ञान से जुड़े हों।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“पिछले पाँच सालों में ये साफ हुआ है कि प्रकृति के विभिन्न तत्वों के बीच में कई संबंध हैं। इन सभी चीजों को पढ़ने और सुनने के बाद मैंने बुद्ध के बारे में सोचना शुरू किया। लगा कि मुझे ये भी जानने की कोशिश करनी होगी कि उन्होंने अपनी मागधी भाषा में क्या कहा है।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“हमारे यहाँ पर कई दार्शनिक, लेखक और कवि हुए हैं जिनके बहुत अलग विचार रहे है, लेकिन हमारी अब तक की संस्कृति का इतिहास, ग़लतफ़हमी का इतिहास है। इसके हजारों उदाहरण है। शायद ये पूरे विश्व भर में लागू होता है।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“पीड़ा मेरे लिए सबसे बड़ा और ज़रुरी शब्द है। आधुनिक भौतिकीशास्त्र और बुद्ध के विचारों में मैं कई तरह के जुड़ाव देखता हूँ। शायद बुद्ध ने पीड़ा को सामान्य लोगों की तरह ना देखा हो लेकिन पीड़ा का उनके लिए कोई दूसरा अर्थ भी रहा हो।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि सच यथार्थ के पीछे छिपी कोई चीज नहीं है, जैसे कि बहते हुए पानी में एक खास रोचकता और सुंदरता होती है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि ये प्रवाह ही सच्चाई है।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“अगर आप मुझे कुछ अर्थपूर्ण बता रहे हैं; तो इस तरह की स्थिति में आप पूर्ण विराम का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि आपको ज़रूरत भी नहीं पड़ती—पूर्ण विराम या अर्द्ध विराम सिर्फ़ औपचारिकताएँ हैं।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“हेराक्लिटस (Heraclitus) का ये कथन कि ‘हम किसी नदी में दुबारा कदम नहीं रखते’—इसकी कितनी भ्रामक व्याख्याएँ हुई हैं। ये वाक्य एक बड़े समूह का हिस्सा है, जो एक जटिल संदर्भ से जुड़ा हुआ है। पूरा यूरोप इस तरह की जटिलता से भरा हुआ है।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“बाहर एक युद्ध चल रहा है और इस निराशा भरी रात में जागना तभी संभव है, जब तुम पूरी तरह निर्दय होने के लिए तैयार हो।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“पुराने गणितज्ञों, दार्शनिकों ने मुझे हमेशा से भारत जाने के लिए प्रेरित किया। एक ग़ैर-मानव के चित्रण ने मुझे हमेशा भारत की तरफ आकर्षित किया।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“अच्छा हो कि हम अपने दिन-प्रतिदिन के जीवन से शुरू करें, जैसे की डोर्का की आँखें जो कि बहुत रहस्यमय है, या आपकी आँखें।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“हमें हर हाल में आगे बढ़ना होता है, भले ही कितनी भी ख़तरनाक बाधाएँ हों और भले ही दूर-दूर तक रोशनी ना दिखे।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“आज मुझे अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मान और स्‍वीकृति मिल रही है इसका कारण सिर्फ़ मेरा लेखन नहीं है; बल्कि असली श्रेय तो उन अनुवादकों को है, जिन्‍होंने अंग्रेज़ी और दूसरी भाषाओं में मेरा साहित्‍य पहुँचाया है।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“फॉकनर मुझे कुछ हद तक रूढ़िवादी लेखक लगता है। उसने छोटे वाक्यों का इस्तेमाल किया तो उसने उन वाक्यों का इस्तेमाल किया, जो उसे जरूरी लगा।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

“एक कवि हमारे सामने खुली आत्मा की तरह होता है। अगर मुझे किसी चीज़ को गहराई तक महसूस करना है, तो किसी कवि को पढ़ता हूँ। मैं गद्य और पद्य को बाँटने वाली लकीर को अच्छी तरह से देख पाता हूँ।”

— लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

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