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लाला हरदयाल — सूक्ति व विचार

लाला हरदयाल के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। लाला हरदयाल के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“हमारी आँखें हैं, इस कारण अंधों के प्रति हमारा कुछ कर्तव्य है। हम अपनी आँखें दिन में एक बार, सप्ताह में एक बार या महीने में एक बार कुछ देर के लिए उन्हें उधार दे दें।”

— लाला हरदयाल

“निस्संदेह मैं तो हिंदू युवकों को वीरों और हुतात्माओं के उस गौरवमय पागलखाने में प्रविष्ट कराना चाहता हूँ जहाँ त्याग को लाभ, ग़रीबी को अमीरी और मृत्यु को जीवन समझा जाता है। मैं तो ऐसे पक्के और पवित्र पागलपन का प्रचार करता हूँ। पागल! हाँ, मैं पागल हूँ। मैं ख़ुश हूँ कि मैं पागल हूँ।”

— लाला हरदयाल

“समस्त अत्याचारी सरकारें एक दूसरे का उपकार करने के लिए सदा तैयार रहती ही हैं।”

— लाला हरदयाल

“केवल साहित्यिक कृतियाँ व्यर्थ हैं। कार्यकर्ता उस प्रकार से नहीं बनाए जा सकते। भारत के आर्थिक इतिहासों से सद्गुण नहीं जगाए जा सकते।”

— लाला हरदयाल

“कृपया सदैव मुझे प्रेमपूर्वक पत्र लिखिए क्योंकि मैं 'मित्रविहीन निर्जन प्रदेश' में हूँ, अकेला हूँ और जो मुझसे प्रेम करते हैं, उनके पत्र मुझे वरदान तुल्य हैं।”

— लाला हरदयाल

“सामाजिक और राजनैतिक उन्नति प्रेम और लगन से पैदा होती है, न कि उपदेशों और लेक्चरबाजी से।”

— लाला हरदयाल

“प्रकृति हर एक व्यक्ति को सभी उपहार नहीं प्रदान करती, वरन् हर एक को वह कुछ-कुछ देती है और इस प्रकार सभी को मिलाकर वह समस्त उपहार देती है।”

— लाला हरदयाल

“जो महापुरुष यह देखता है कि प्रत्येक व्यक्ति में, चाहे वह कितना ही ग़रीब या जंगली क्यों न हो—सर्वोच्च नैतिक विकास की क्षमता है, वही महापुरुष समाज का उद्धारक होता है। वह मानव स्वभाव के सार को जानता है। वह उन लोगों में शक्ति भर देता है जो प्रत्यक्षतः कमज़ोर हैं। वह पृथ्वी के कूड़ा करकट से वीर उत्पन्न कर देता है।”

— लाला हरदयाल

“इतिहास का खेल न्यारा है। सदा नए चमत्कार होते रहते हैं। नए गुल भी खिलते रहते हैं। संभव और असंभव ये दोनों शब्द इतिहास में निरर्थक हैं।”

— लाला हरदयाल

“मैं अब अपने आदर्श से हटकर जीने की अपेक्षा के समीप मरना अधिक पसंद करूँगा।”

— लाला हरदयाल

“क्षणिक साहित्य की अपेक्षा पत्रिका अधिक उपयोगी होती है। पत्रिका तो किसी दल की एक संस्था ही होती है।”

— लाला हरदयाल

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