“जहाँ सीधे प्रमाण नहीं मिलते, वहाँ दर्शन हावी हो जाता है।”
— भगत सिंह
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भगत सिंह के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। भगत सिंह के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।
“जहाँ सीधे प्रमाण नहीं मिलते, वहाँ दर्शन हावी हो जाता है।”
— भगत सिंह
“यदि विश्वास विवेक की आँच बरदाश्त नहीं कर सकता, तो ध्वस्त हो जाएगा।”
— भगत सिंह
“मेरे विचार से जिस आदमी में थोड़ा-सा भी विवेक होता है, वह हमेशा अपनी परिस्थितियों को तर्कसंगत ढंग से समझना चाहता है।”
— भगत सिंह
“शक्ति का प्रयोग अत्यंत आवश्यक होने पर ही उचित है, और आम जनता के तमाम आंदोलनों के लिए अहिंसा की नीति अपरिहार्य है।”
— भगत सिंह
“प्रगति में समर्थक व्यक्ति के लिए यह अनिवार्य है कि वह पुराने विश्वास से संबंधित हर बात की आलोचना करे, उसमें अविश्वास करे और उसे चुनौती दे।”
— भगत सिंह
“हम पशुओं की पूजा करते हैं, लेकिन इंसान को पास नहीं फटकने देते।”
— भगत सिंह
“आलोचना और स्वतंत्र चिंतन, क्रांतिकारी के दो अनिवार्य गुण होते हैं।”
— भगत सिंह
“किसी स्वार्थपूर्ण इरादे के बिना, इहलोक या परलोक में कोई पुरस्कार पाने की इच्छा के बिना, बिल्कुल अनासक्त भाव से मैंने अपना जीवन आज़ादी के उद्देश्य के लिए अर्पित किया है, क्योंकि मैं ऐसा किए बिना रह नहीं सका।”
— भगत सिंह
“प्रगति के समर्थक; प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह अनिवार्य है कि वह पुराने विश्वास से जुड़ी हर बात की आलोचना करे, उस पर अविश्वास करे और उसे चुनौती दे।”
— भगत सिंह
“मैं स्वयं को ईश्वर में विश्वास करने और उसकी प्रार्थना के लिए तैयार नहीं कर सकता।”
— भगत सिंह
“कोरा विश्वास और अंधविश्वास ख़तरनाक होता है, क्योंकि वह दिमाग़ को कुंद करता है और आदमी को प्रतिक्रियावादी बना देता है।”
— भगत सिंह
“ईश्वर की उत्पत्ति के बारे में मेरा अपना विचार यह है कि मनुष्य ने जब अपनी कमियों और कमज़ोरियों पर विचार करते हुए अपनी सीमाओं का एहसास किया, तो मनुष्य को तमाम कठिन परिस्थितियों का साहसपूर्वक सामना करने, और तमाम ख़तरों के साथ वीरतापूर्वक जूझने की प्रेरणा देने वाली तथा सुख-समृद्धि के दिनों में उसे उच्छृंखल हो जाने से रोकने और नियंत्रित करने वाली, सत्ता के रूप ईश्वर की कल्पना की।”
— भगत सिंह
“मैं यह नहीं मानता कि उन्हीं लोगों ने ईश्वर को पैदा किया, हालाँकि मैं इस मूल बात से सहमत हूँ कि सभी विश्वास, धर्म, मत और इस प्रकार की अन्य संस्थाएँ; अंततः दमनकारी तथा शोषक संस्थाओं, व्यक्तियों और वर्गों की समर्थक बनकर ही रहीं।”
— भगत सिंह
“धार्मिक उपदेशकों और सत्ताधारियों की मिलीभगत से ही जेलों, फांसियों, कोड़ों और इन सिद्धांतों का निर्माण हुआ है।”
— भगत सिंह
“वास्तव में हमारे देश के सभी राजनीतिक आंदोलनों में, जिन्होंने हमारे आधुनिक इतिहास में कोई महत्तवपूर्ण भूमिका निभाई है—उस आदर्श की कमी रही है, जिसकी प्राप्ति उसका लक्ष्य था।”
— भगत सिंह
“हेकड़ी, अथवा और ज़्यादा ठीक-ठीक कहें, तो 'अहंकार'—किसी को अपने ऊपर हो जाने वाले अनुचित गर्व का नाम है।”
— भगत सिंह
“जब कोई आदमी पाप या अपराध करना चाहता है, तो आपका सर्वशक्तिमान ईश्वर उसे रोकता क्यों नहीं?”
— भगत सिंह
“प्रकृति का निर्देशन और संचालन करने वाली किसी चेतन परमसत्ता का कोई अस्तित्व नहीं है।”
— भगत सिंह
“स्वयं को विरोधियों के तर्कों का सामना करने लायक बनाने के लिए अध्ययन करो।”
— भगत सिंह
“अख़बारों का काम भारत की साझी राष्ट्रीय विरासत और परस्पर मेल-मिलाप की भावना को बढ़ावा देना है। लेकिन उसने अपना मुख्य कर्तव्य अज्ञान फैलाना, संकीर्णता का प्रचार करना, लोगों को साम्प्रदायिक बनाना और हमारी साझी विरासत को नष्ट करने को बना रखा है।”
— भगत सिंह
“यदि धर्म को राजनीति से अलग कर दिया जाए; तो हम सब राजनीति में इकट्ठे हो सकते हैं, भले ही हमारी धार्मिक मान्यताएँ जो भी हों।”
— भगत सिंह
“एकमात्र सुधार का सिद्धांत ही मानवीय प्रगति के लिए आवश्यक और अनिवार्य है।”
— भगत सिंह
“लोग जिस तरह भूतों और प्रेतात्माओं में विश्वास करने लगे, उसी तरह ईश्वर में विश्वास करने लगे। फ़र्क़ सिर्फ़ यह है कि ईश्वर में विस्वास सर्वव्यापी है, और इसका दर्शन बहुत विकसित है।”
— भगत सिंह
“यथार्थवादी होने का दावा करनेवाले को तो समूचे पुरातन विश्वास को चुनौती देनी होगी। यदि विश्वास विवेक का ताप नहीं सह सकता है, तो वह अपने आप ध्वस्त हो जाएगा।”
— भगत सिंह
“आस्तिकता मुश्किलों को आसान कर देती है, यहाँ तक कि उन्हें ख़ुशगवार भी बना सकती है।”
— भगत सिंह