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सरदार वल्लभ भाई पटेल — सूक्ति व विचार

सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“अधिकार हज़म करने के लिए जब तक पूरी क़ीमत न चुकाई जाए, तब तक यदि अधिकार मिल भी जाए तो उसे गँवा बैठेंगे।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“सिपाही यह कहे कि हमें लड़ना तो है, मगर वे हथियार नहीं रखने हैं जो सेनापति बतलाता है, तो वह लड़ाई नहीं चल सकती।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“दरिद्रनारायण के दर्शन करने हों, तो किसानों के झोंपड़ों में जाओ।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“मनुष्य रुपया कमाना जानता है, परंतु सभी को यह मालूम नहीं होता कि कमाई का सदुपयोग कैसे किया जाए।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“अब जात-पाँत के, ऊँच-नीच के, संप्रदायों के भेद-भाव भूलकर सब एक हो जाइए। मेल रखिए और निडर बनिए। तुम्हारे मन समान हों। घर में बैठकर काम करने का समय नहीं है। बीती हुई घड़ियाँ ज्योतिषी भी नहीं देखता।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“जो किसान मूसलाधार बरसात में काम करता है, कीचड़ में खेती करता है, मरखने बैलों से काम लेता है और सर्दी-गर्मी सहता है, उसे डर किसका?”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“बोलने में मर्यादा मत छोड़ना। गालियाँ देना तो कायरों का काम है।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“हमें चार चीज़ों की ज़रूरत है। हवा, पानी, रोटी और कपड़ा। दो चीज़ें भगवान ने मुफ़्त दी हैं। और जैसे रोटी घर में तैयार होती है, वैसे ही कपड़ा भी हमारे घर में बनना चाहिए।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“अपने मंदिरों को अछूतों के लिए खोलकर सच्चे देव-मंदिर बनाइए। आपके ब्राह्मण-ब्राह्मणेतर के झगड़ों की दुर्गंध भी कँपकँपी लाने वाली है। जब तक आप इस दुर्गंध को नहीं मिटाएँगे, तब तक कोई काम नहीं होगा।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“राज्य अपना धर्म पालन करे या न करे, मगर हमें तो अपना कर्त्तव्य पूरा करने के लिए तैयार रहना चाहिए।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“मैं किसानों को भिखारी बनते नहीं देखना चाहता। दूसरों की मेहरबानी से जो कुछ मिल जाए, उसे लेकर जीने की इच्छा की अपेक्षा अपने हक़ के लिए मर-मिटना मैं ज़्यादा पसंद करता हूँ।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“अस्पृश्य की व्याख्या आप जानते हैं। प्राणी के शरीर में से जब प्राण निकल जाते हैं, तब वह अस्पृश्य बन जाता है। मनुष्य हो या पशु, जब वह प्राणहीन बनकर शव होकर पड़ जाता है—तब उसे कोई नहीं छूता, और उसे दफ़नाने या जलाने की क्रिया होती है। मगर जब तक मनुष्य या प्राणिमात्र में प्राण रहते हैं, तब तक वह अछूत नहीं होता। यह प्राण प्रभु का एक अंश है और किसी भी प्राण को अछूत कहना भगवान के अंश का, भगवान का तिरस्कार करने के बराबर है।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“जहाँ किसान सुखी नहीं है, वहाँ राज्य भी सुखी नहीं है और साहूकार भी सुखी नहीं है।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“किसान के बराबर सर्दी, गर्मी, मेह, और मच्छर-पिस्सू वगैरा का उपद्रव कौन सहन करता है?”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“थोड़ा भाषण देना आ जाने से, और अख़बारों मे लिखना सीख जाने से ही नेता बन जाने की नौजवानों मे कल्पना हो तो वह ग़लत है। सीढ़ी-दर-सीढ़ी चढ़ना चाहिए”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“यह शरीर मिट्टी का बना हुआ है, मिट्टी के पुतले की तरह टूट जाने वाला है। लाठियों से सिर के टुकड़े हो जाएँगे, मगर दिल के टुकड़े नहीं होंगे। आत्मा को गाली या लाठी नहीं मार सकती। दिल के भीतर की असली चीज़ को— आत्मा को कोई हथियार नहीं छू सकता।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“जिसने ईश्वर को पहचान लिया, उसके लिए तो दुनिया में कोई अछूत नहीं है। उसके मन में ऊँच-नीच का भेद नहीं है।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“भगवान् सबसे दुःखी मनुष्यों में रहता है। वह महलों में नहीं जाता।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“प्राण लेने का अधिकार तो ईश्वर को है। सरकार की तोप बंदूक़ें हमारा कुछ नहीं कर सकतीं।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“इस धरती पर अगर किसी को सीना तानकर चलने का अधिकार हो, तो वह धरती से धन-धान्य पैदा करने वाले किसान को ही है।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“इस दुनिया में सत्ता के पीछे लगा हुआ सबसे बड़ा रोग कोई हो सकता है, तो वह खु़ुशामद है।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“जिन्हें ख़ुशामद प्रिय होती है, उन्हें सच्ची बात मीठी भाषा में कही जाए तो भी कड़वी लगती है।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“मनुष्यों के दिल सुंदर व्याख्याओं से नहीं हिलाए जा सकते और हिलाए जा सकते हों तो भी क्षण भर के लिए ही। यदि हमें कोई बड़ा काम करना हो, तो करके ही दिखाया जा सकता है।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“सारी दुनिया किसान के आधार पर टिकी हुई है। दुनिया के आधार किसान और मज़दूर पर है। फिर भी सबसे ये दोनों बेज़ुबान होकर अत्याचार सहन करते हैं। ज़्यादा ज़ुल्म कोई सहता है, तो ये दोनों हो सहते हैं। क्योंकि ये दोनों बेज़ुबान होकर अत्याचार सहन करते हैं।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“भगवान के आगे झुकना चाहिए, दूसरों के आगे नहीं झुकना चाहिए। हमारा सिर कभी न झुकनेवाला होना चाहिए। देहात में रहनेवाले लोग निर्भय होने चाहिए, इसके बजाय उनमें हमेशा डर होता है।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“जो काम कल करने का है, उसकी बातों में ही आज का काम बिगड़ जाएगा। और आज के बिना कल का काम नहीं होगा। हम अपने फ़र्ज़ से चूकेंगे। आज का काम कीजिए, तो कल का काम अपने आप हो जाएगा।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“लोहा भले ही गरम हो जाए, परंतु हथौड़े को तो ठंडा ही रहना चाहिए। हथोड़ा गरम हो जाए तो अपना ही हत्था जला देगा। आप ठंडे ही रहिए। कौन-सा लोहा गरम होने के बाद ठंडा नहीं होता? कोई भी राज्य प्रजा पर कितना ही गरम क्यों न हो जाए, उसे अंत में ठंडा होना ही पड़ेगा।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“हमारी भारत-भूमि की एक बड़ी विशेषता है। चाहे जितने उतार-चढ़ाव आएँ, तो भी पुण्यशाली आत्माएँ यहाँ जन्म लेती ही हैं।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“जब जनता एक हो जाती है, तब उसके सामने ज़ालिम से ज़ालिम हुकूमत भी नहीं टिक सकती।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“सत्ता के सामने सयानापन बेकार है। मोम का हाकिम लोहे के चने चबवाता है।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

“सच्ची बात तो यह है कि दो घोड़ों पर सवारी नहीं हो सकती, एक घोड़े पर ही सवारी होगी। अपना घोड़ा पसंद कर लो।”

— सरदार वल्लभ भाई पटेल

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