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जूलिया क्रिस्तेवा — सूक्ति व विचार

जूलिया क्रिस्तेवा के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। जूलिया क्रिस्तेवा के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“प्रेम वह समय और स्थान है : जहाँ ‘मैं’ अपने आपको असाधारण बनने का अधिकार देती हूँ।”

— जूलिया क्रिस्तेवा

“माता-पिता से वंचित हो जाना—क्या स्वतंत्रता वहीं से शुरू होती है?”

— जूलिया क्रिस्तेवा

“वह विदेशी है, वह कहीं से भी नहीं है, वह हर जगह से है, दुनिया का नागरिक, महानगरीय है। उसे उसके मूल स्थान पर वापस न भेजें।”

— जूलिया क्रिस्तेवा

“दुख को नाम देना, उसे बढ़ा-चढ़ाकर, उसके सबसे छोटे घटकों में विघटित करना—शोक को कम करने का निश्चित तरीक़ा है।”

— जूलिया क्रिस्तेवा

“चूँकि उसके पास कुछ भी नहीं है, वह कुछ भी नहीं है : वह सब कुछ त्याग सकता है।”

— जूलिया क्रिस्तेवा

“दूसरों के लिए महत्त्वपूर्ण हुए बिना, कोई आपकी बात नहीं सुनता है।”

— जूलिया क्रिस्तेवा

“क्या कोई इसके सिवाय किसी अन्य शर्त पर भी लिखता है कि वह असीम भाव-विरेचन के लिए दुर्दशा की स्थिति में होता है?”

— जूलिया क्रिस्तेवा

“हमें यह मान लेना चाहिए कि कोई किसी दूसरे देश में इसलिए विदेशी बन जाता है, क्योंकि वह अंदर से पहले से ही विदेशी होता है?”

— जूलिया क्रिस्तेवा

“धर्म के विश्लेषण-योग्य होने का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि कोई ऐसा तरीक़ा है जिससे इसके बिना काम चलाया जा सके।”

— जूलिया क्रिस्तेवा

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