“शायद यह संसार रसोई की मेज़ पर ही समाप्त होगा, जबकि हम हँसते और रोते होंगे, और निश्चिन्तता से अपना अंतिम मीठा निवाला खाते होंगें।”
विचारघर › विदेशी साहित्यकार › जॉय हार्जो
जॉय हार्जो — सूक्ति व विचार
जॉय हार्जो के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। जॉय हार्जो के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।
“युद्ध इसी मेज़ पर शुरू हुए हैं और समाप्त भी । यह आतंक की परछाईं से छिपने की सटीक जगह है। एक भयावह जीत का जश्न मनाने की जगह भी।”
“हमने अपनी संतानों को इसी मेज़ पर जन्म दिया है और यहीं अपने माता-पिता को विदा करने से पूर्व तैयार भी किया है।”
“हमारी महत्वाकांक्षाएँ हमारे साथ यहाँ कॉफ़ी पीती हैं और अपनी बाहें हमारे बच्चों के गले में डाल देती हैं । वे हमारे गिरते-पड़ते बेचारे स्वरूपों पर हमारे साथ हँसती हैं और हम एक बार पुनः स्वयं को मेज़ पर स्थापित पाते हैं।”
“धरती की तमाम नेमतें लाई जाती हैं और पकाकर मेज़ पर सजा दी जाती हैं। ऐसा सृष्टि के उद्गम के साथ होता आया है और आगे भी ऐसा ही चलेगा।”
“मेज़ पर ही हम गपशप करते हैं, फिर जगाते हैं दुश्मनों और प्रेमियों की प्रेतात्माओं को।”
“दुनिया खाने की मेज़ पर ही शुरू होती है। चाहे जो भी हो, हमें जीने के लिए खाना ही होता है।”
“इस मेज़ के इर्द गिर्द हम गाते रहे हैं उत्सव में और शोक में भी। यहीं हम कष्ट में प्रार्थनारत रहे हैं और पश्चाताप में भी। यहाँ हम कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं।”
“यह मेज़ बारिश के दिनों में घर रही है और धूप में एक छाता।”