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जॉन मिल्टन — सूक्ति व विचार

जॉन मिल्टन के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। जॉन मिल्टन के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“राजाओं और दंडाधिकारियों की शक्ति उसके अतिरिक्त अन्य कुछ नहीं है, जो जनता से व्युत्पन्न, रूपांतरित तथा अपने सार्वजनिक हित में उससे लेकर विश्वासपूर्वक उन्हें सौंप दी गई है, उस जनता से जिसमें शक्ति मूलतः सन्निहित है और लोगों के प्राकृतिक जन्मसिद्ध अधिकार का उलंघन किए बिना उनसे नहीं ली जा सकती।”

— जॉन मिल्टन

“जो केवल खड़े रहते हैं तथा प्रतीक्षा करते हैं, वे भी सेवा करते हैं।”

— जॉन मिल्टन

“सब विद्वत्ता व्वर्थ है और दर्शनशास्त्र मिथ्या है।”

— जॉन मिल्टन

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