“प्रिय के प्रसन्न होने पर मैं उमंगभरी हो जाती हूँ और प्रिय के उमंग भरे होने पर मैं उनका एक अंग बन जाती हूँ प्रिय मेरे हैं और मैं उनकी हूँ, इस प्रकार हम दोनों अब एक हो गए हैं।”
— जमाल
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“प्रिय के प्रसन्न होने पर मैं उमंगभरी हो जाती हूँ और प्रिय के उमंग भरे होने पर मैं उनका एक अंग बन जाती हूँ प्रिय मेरे हैं और मैं उनकी हूँ, इस प्रकार हम दोनों अब एक हो गए हैं।”
— जमाल