“थोड़ा खाता है तो भूख के मारे कल्पना-जल्पना करता है, अधिक खाता है तो रोगी हो जाता है। कोई विरला योगी ही दोनों पक्षों की संधि का विचार करता है (अर्थात् उचित आहार करता है)।”
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जालंधर नाथ — सूक्ति व विचार
जालंधर नाथ के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। जालंधर नाथ के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।