“चीज़ों को सहना ही तुम्हारा सबसे अच्छा काम है। अपने दाँत पीसकर उन्हें सह लेना।”
— हान कांग
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“चीज़ों को सहना ही तुम्हारा सबसे अच्छा काम है। अपने दाँत पीसकर उन्हें सह लेना।”
— हान कांग
“यह बारिश दिवंगत की आत्माओं द्वारा बहाए गए आँसू हैं।”
— हान कांग
“मैं तुम्हारे मरने के बाद तुम्हारा अंतिम संस्कार नहीं कर सकी… इसलिए मेरा जीवन एक अंतिम संस्कार बन गया।”
— हान कांग
“वह सोचती है कि काश किसी की आँखें दूसरों को दिखाई नहीं देतीं। काश कोई अपनी आँखों को दुनिया से छिपा पाता।”
— हान कांग
“उस दूसरी दुनिया का समय अब पिछले हफ़्ते से ज़्यादा वास्तविक नहीं लगता।”
— हान कांग
“चाँद रात की आँख है।”
— हान कांग
“मरना इतनी बुरी बात क्यों है?”
— हान कांग
“तुम्हें पता है कि एक व्यक्ति के रूप में तुम्हारे पास न तो बहादुरी की क्षमता है और न ही ताक़त की।”
— हान कांग
“कहावत है कि कुत्ते के काटने से हुए घाव को ठीक करने के लिए आपको उसी कुत्ते को खाना पड़ता है… और मैंने अपने लिए एक निवाला ले लिया।”
— हान कांग
“आत्मा के पास शरीर नहीं होता, तब वह हमें कैसे देख सकती है?”
— हान कांग
“वह एक अच्छी स्त्री है—उसने सोचा—ऐसी स्त्री जिसकी अच्छाई कष्टप्रद है।”
— हान कांग
“हम अँधेरे में क्यों चल रहे हैं… चलो वहाँ चलते हैं, जहाँ फूल खिल रहे हैं।”
— हान कांग
“विवेक—विवेक दुनिया की सबसे भयानक चीज़ है।”
— हान कांग
“कोई माफ़ी नहीं मिलेगी। कम से कम मेरे लिए तो नहीं।”
— हान कांग
“वह ख़ुद के ख़िलाफ़ बँधा हुआ था… क्या वह सामान्य इंसान था?”
— हान कांग
“समय एक लहर की तरह था—अपनी कठोरता में लगभग क्रूर।”
— हान कांग
“मैं अब जानवर नहीं हूँ।”
— हान कांग
“काश मैं सपनों में छिप पाती या शायद यादों में!”
— हान कांग
“कृपया अपनी किताब लिखें ताकि कोई भी मेरे भाई की यादों को फिर से अपवित्र न कर सके।”
— हान कांग
“अगर उसके पास कभी आत्मा जैसी कोई चीज़ होती तो वह उसके टूटने का क्षण होता।”
— हान कांग
“तुम जब मांस खाना बंद करोगी तो दुनिया तुम्हें पूरा निगल जाएगी।”
— हान कांग
“मूर्ख, भूत को हाथों की क्या ज़रूरत है?”
— हान कांग
“मैंने ख़ुद को कभी यह नहीं भूलने दिया कि मैं जिस भी व्यक्ति से मिलती हूँ, वह इस मानव-जाति का सदस्य है।”
— हान कांग
“बिना किसी आवाज़ के और बिना किसी हलचल के, मेरे अंदर की कोई कोमल चीज़ टूट गई। कुछ ऐसी चीज़, जिसके होने का मुझे तब तक एहसास भी नहीं हुआ था।”
— हान कांग
“मैं तुम्हें निगल जाना चाहती हूँ और चाहती हूँ कि तुम मुझमें पिघल जाओ और मेरी नसों में बह जाओ।”
— हान कांग