“काव्य-रचना में सहृदय व्यक्ति कुछ ही होते हैं और वे सहृदय स्वेच्छाचारी नहीं (अपितु काव्य-रचना के नियमों से अभिज्ञ एवं उनके पालन में प्रवीण) होते हैं।”
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गोविंद स्वामी — सूक्ति व विचार
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