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गर्ट्रूड स्टाइन — सूक्ति व विचार

गर्ट्रूड स्टाइन के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। गर्ट्रूड स्टाइन के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“एक साधारण बेटी के संग यदा-कदा पहचान को बदल देने से बेटे का निर्माण नहीं हो जाता।”

— गर्ट्रूड स्टाइन

“एक छोटे कलाकार के पास एक महान कलाकार के सभी त्रासिक दुःख और संताप होते हैं और वह महान कलाकार नहीं होता।”

— गर्ट्रूड स्टाइन

“तुम आकर्षित करते हो वो जो एक प्रेमी के तौर पर तुम्हारी ज़रूरतें हैं।”

— गर्ट्रूड स्टाइन

“दया और दवा में कोई एहसानमंदी नहीं है। अगर उधार लेना प्राकृतिक नहीं हो तो देने का कोई अर्थ भी है।”

— गर्ट्रूड स्टाइन

“जीनियस बनने में बहुत समय लगता है। बहुत देर तक बैठे रहना पड़ता है—बिना कुछ करते हुए, सच में बिना कुछ करते हुए।”

— गर्ट्रूड स्टाइन

“दया से लालिमा आती है, निर्दयता से त्वरित एक ही प्रश्न, एक आँख से अनुसंधान जन्मता है, चयन से कष्टप्रद मवेशी।”

— गर्ट्रूड स्टाइन

“एक बहुत महत्त्वपूर्ण चीज़ यह है कि ऐसा मन न बना लें कि आप कोई भी एक चीज़ हैं।”

— गर्ट्रूड स्टाइन

“अगर तुम किसी के बारे में कुछ अच्छा नहीं कह सकते तो मेरी बग़ल में आकर बैठो।”

— गर्ट्रूड स्टाइन

“उद्धरण के होने से पहले प्रश्न का आना नहीं होता।”

— गर्ट्रूड स्टाइन

“बहुत ज़ोर से या फिर ख़ूब निष्ठा से बेहोश होती हुई।”

— गर्ट्रूड स्टाइन

“साहित्य—रचनात्मक साहित्य—सेक्स से असंबद्ध होकर—अचिंतनीय है।”

— गर्ट्रूड स्टाइन

“पुनरावृत्ति जैसी कोई चीज़ नहीं है, केवल आग्रह हैं।”

— गर्ट्रूड स्टाइन

“अगर तुम्हें सब मालूम होता तो क्रिएशन नहीं डिक्टेशन होता।”

— गर्ट्रूड स्टाइन

“मनोरंजक पक्ष यह है कि जितनी जल्दी जितना कम न हो सके, उतना ही अवश्यंभावी है ज़रूरतों का अवसान।”

— गर्ट्रूड स्टाइन

“कोई भी उत्तर नहीं है, कोई भी उत्तर नहीं होने वाला है,कोई भी उत्तर कभी नहीं हुआ है,यही तुम्हारा उत्तर है।”

— गर्ट्रूड स्टाइन

“अगर सभी इतने अकर्मण्य नहीं होते तो उन्हें मालूम होता कि सुंदरता सुंदरता ही है, चाहे जब वह चिड़चिड़ी और उत्तेजक हो, केवल तभी नहीं जब वह स्वीकार्य और शास्त्रीय हो।”

— गर्ट्रूड स्टाइन

“उस हिंसक प्रकार के आनंद का क्या मतलब है, अगर उससे न थक पाने में कोई सुख ही नहीं हो तो।”

— गर्ट्रूड स्टाइन

“अपनी सीमाओं के भीतर के भीतर तुम अतिसाधारण हो, लेकिन तुम्हारी सीमाएँ अतिसाधारण हैं।”

— गर्ट्रूड स्टाइन

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