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एडमंड बर्क — सूक्ति व विचार

एडमंड बर्क के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। एडमंड बर्क के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“आप कभी भी अतीत के द्वारा भविष्य की योजना नहीं बना सकते।”

— एडमंड बर्क

“अराजकता का इलाज स्वतंत्रता है न कि दासता, वैसे ही जैसे अंधविश्वास का सच्चा इलाज नास्तिकता नहीं, धर्म है।”

— एडमंड बर्क

“यह वह बात नहीं है जो वकील बताए कि मुझे करनी चाहिए, अपितु यह वह बात है जो मानवता, विवेक और न्याय बताते हैं कि मुझे करनी चाहिए।”

— एडमंड बर्क

“सभी के लिए एक क़ानून है अर्थात् वह क़ानून जो सभी क़ानूनों का शासक है, हमारे विधाता का क़ानून, मानवता, न्याय, समता का क़ानून, प्रकृति का क़ानून, राष्ट्रों का कानून।”

— एडमंड बर्क

“जब बुरे व्यक्ति संगठित हो जाते हैं, तब अच्छों को भी मिल जाना चाहिए; अन्यथा वे एक-एक करके पराजित हो जाएँगे।”

— एडमंड बर्क

“मानवों का विद्यालय 'उदाहरण' है और वे अन्यत्र कुछ नहीं सीखेंगे।”

— एडमंड बर्क

“ऐसी घटना घटित हुई है जिस पर बोलना कठिन है और चुप रहना असंभव है।”

— एडमंड बर्क

“अंधविश्वास दुर्बल मनों का मज़हब है।”

— एडमंड बर्क

“ख़तरों से घृणा की जाए तो वे और बड़े हो जाते हैं।”

— एडमंड बर्क

“जनता के लिए सबसे अधिक शोर मचाने वालों को उसके कल्याण के लिए सबसे उत्सुक मान लेना सर्वसामान्य प्रचलित त्रुटि है।”

— एडमंड बर्क

“असत्य चिरस्थायी स्रोत वाला होता है।”

— एडमंड बर्क

“केवल बल का प्रयोग तो अस्थायी होता है। यह क्षणभर को हरा सकता है किंतु इससे पुनः हराने की आवश्यकता समाप्त नहीं हो जाती और वह राष्ट्र, जिसे निरंतर जीतते ही रहना पड़े, शासित नहीं है।”

— एडमंड बर्क

“प्रकृति एक बात कहे और बुद्धिमत्ता दूसरी, ऐसा नहीं हुआ, नहीं-नहीं, कभी नहीं।”

— एडमंड बर्क

“अत्याचारीगण बहाने नहीं चाहते।”

— एडमंड बर्क

“महान व्यक्ति राज्य में पथप्रदर्शक चौकियों तथा युगांतरकारी घटनाओं के समान होते हैं।”

— एडमंड बर्क

“प्रशंसा करिए जब हम दौड़ें, सांत्वना दीजिए जब हम गिरें, उत्साहित करिए जब हमारा पुनरुत्थान हो, किंतु भगवान के लिए हमें बढ़ने दीजिए, हमें बढ़ने दीजिए।”

— एडमंड बर्क

“नया परिवर्तन करना सुधार करना नहीं हैं।”

— एडमंड बर्क

“प्रथा हमें प्रत्येक वस्तु से समंजित करा देती है।”

— एडमंड बर्क

“मैं उस भारतीय जनता के नाम पर, जिसके अधिकारों को उसने पददलित किया है और जिसके देश को उसने उजाड़ कर दिया है, उस पर महाभियोग लगाता हूँ। अंततः स्वयं मानव प्रकृति के नाम पर, स्त्रियों और पुरुषों दोनों के नाम पर, हर उम्र के नाम पर, हर पद के नाम पर, मैं सभी के आम शत्रु और उत्पीड़क पर महाभियोग लगाता हूँ।”

— एडमंड बर्क

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