“मनुष्यों के रीति-रिवाज तथा फ़ैशन शाखाओं पर की पत्तियों के समान बदलते रहते हैं, कुछ चले जाते हैं और दूसरे आ जाते हैं।”
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दांते अलीघिएरी — सूक्ति व विचार
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