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चक्रवर्ती राजगोपालाचारी — सूक्ति व विचार

चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“समाज धर्म के कारण से संगठित रहते हैं चाहे लोग उसका (धर्म का प्रदर्शन करें या उसे अपने हृदय में रखें। जब धर्म समाप्त हो जाता है तब पारस्परिक विश्वास भी नष्ट हो जाता है, लोगों का आचरण भ्रष्ट हो जाता है और उसका फल राष्ट्र को भुगतना पड़ता है। धर्म सुलाने वाला नहीं है अपितु शक्ति का आधार-स्तंभ है।”

— चक्रवर्ती राजगोपालाचारी

“आत्म-संयम अर्थात् आत्मानुशासन ही कलात्मक सौंदर्य को सुंदर एवं व्यवस्था को सुव्यवस्थित और आनंददायक बनाता है।”

— चक्रवर्ती राजगोपालाचारी

“मनुष्य भोजन, जल और शुद्ध हवा से जितना छुटकारा पा सकता है, उससे अधिक छुटकारा ईश्वर से नहीं पा सकता।”

— चक्रवर्ती राजगोपालाचारी

“भारत में जो ईश्वर को मानव-मन से निकालने का उपदेश देता है, वह सामाजिक विघटन का उपदेश देता है।”

— चक्रवर्ती राजगोपालाचारी

“निस्संदेह सशक्त सरकार और राजभक्त जनता से उत्कृष्ट राज्य का निर्माण होता है। परंतु बहरी सरकार और गूँगे लोगों से लोकतंत्र का निर्माण नहीं होता।”

— चक्रवर्ती राजगोपालाचारी

“कोई भाषा कभी नहीं मरती। मरती है तो व्यक्ति की उस भाषा को सीखने और काम में लाने की क्षमता, स्वयं भाषा नहीं।”

— चक्रवर्ती राजगोपालाचारी

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