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चैतन्य महाप्रभु — सूक्ति व विचार

चैतन्य महाप्रभु के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। चैतन्य महाप्रभु के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“मुझमें न भगवान् का प्रेम है, न श्रवणादि भक्ति है, न वैष्णवों का योग है, न ज्ञान है, न शुभ कर्म है, और कितने आश्चर्य की बात है कि उत्तम गति भी नहीं है, फिर भी हे भगवान्! हीन अर्थ को भी उत्तम बना देने वाले आपके विषय में आबद्धमूला मेरी आशा ही मुझको प्रयत्नशील बनाए रहती है।”

— चैतन्य महाप्रभु

“हे जगत्पति! मुझे न धन की कामना है, न जन की,न सुंदरी की और न कविता की। हे प्रभु! मेरी कामना तो यह है कि जन्म-जन्म में आपकी अहैतुकी भक्ति करता रहूँ।”

— चैतन्य महाप्रभु

“हे भगवान्! आपने अपने बहुत नाम प्रकट किए हैं, जिनमें आपने अपनी सब शक्ति भर दी है और आपने उनके स्मरण के लिए कोई काल भी सीमित नहीं किए हैं। आपकी ऐसी कृपा है परंतु मेरा ऐसा दुर्भाग्य है कि इस जीवन में मुझमें कोई भक्ति नहीं है।”

— चैतन्य महाप्रभु

“हे प्रभु! कब ऐसा होगा कि आपका नाम लेने में मेरे मुख पर अश्रुधारा बहने लगे, वाणी गद्गद होकर रुँध जाए और सारा शरीर पुलकित होकर रोमांचित हो जाए?”

— चैतन्य महाप्रभु

“हे देवाधिदेव! अत्यंत शीघ्र ही इस असार संसार को मेरे मन से दूर कर दो। हे यादवेश! मेरे पाप-समूहों को मुझसे दूर कर दो। हे भगवान! आप दीन व अनाथ पर अवश्य ही अचल कृपा करते हैं। हे जगन्नाथ स्वामी! मुझे दर्शन दो।”

— चैतन्य महाप्रभु

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