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आशीष नंदी — सूक्ति व विचार

आशीष नंदी के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। आशीष नंदी के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“दार्शनिक वह जिसके पास दर्शन (विजन) हो—प्रोफेटिक विजन, प्रोफेटिक टच के साथ।”

— आशीष नंदी

“मानवीय मूल्य मनुष्य के जैविक आत्म में उपजता है।”

— आशीष नंदी

“बहुसांस्कृतिकता हमारी संस्कृति का अनिवार्य पक्ष है। यह हमारी भाषा, हमारे रहन-सहन, हमारे विश्वास का एक ज़रूरी हिस्सा है, इसलिए मेरा काम भविष्य को खुला रखने के लिए संघर्ष करने का है।”

— आशीष नंदी

“मैं मानवमात्र के प्रति किसी भी तरह की आभियांत्रिकी के ख़िलाफ़ हूँ।”

— आशीष नंदी

“मेरा मानना है कि विचारधारा में फंसे लोग शैतान हो सकते हैं।”

— आशीष नंदी

“हर बड़ा सिस्टम अपने दुश्मनों के आकार को घटाकर, आंतरिक आलोचक बना लेता है और उन्हें अपनी अंत:वृत्त में रखकर निर्णय करता है और विरोधों, उनके प्रतिरोध में से कुछ को सामान्य, तार्किक और न्यायोचित तथा कुछ को असामान्य, पागलपन और अवैध क़रार देता है।”

— आशीष नंदी

“मिथक में न मात्र स्मरण साक्ष्यों के सिद्धांत का सिद्धांत निहित है, वरन् साथ ही विस्मरण का सिद्धांत भी।”

— आशीष नंदी

“अतीत के प्रति पारंपरिक भारतीय दृष्टिकोण—जैसे कि इस सदृश दूसरे समाजों में भी है—इस मान्यता का एक नकार है। यह नकार उस सिद्धांत के जड़ में प्रहार करता है, जिस पर आधुनिक संगठित हिंसा अधिकाधिक आश्रित है।”

— आशीष नंदी

“विकास अपने आपमें ही एक प्रक्रिया है; जो पर्यावरण की उपेक्षा, समुदायों के दीर्घकालीन माँगों की उपेक्षा करता है।”

— आशीष नंदी

“किसी न किसी प्रकार की भाषा, संवाद के माध्यम हर आदगी बना ही लेता है।”

— आशीष नंदी

“हिंसा की किसी-न-किसी तरह की सीमा; युवा सदस्यों की परिवार के प्रति उत्तरदायित्व की सीमा, हर प्रजाति तय कर ही लेती है।”

— आशीष नंदी

“जब यह प्रतीत होता है कि मैं इतिहास के ख़िलाफ़ हूँ; तो वस्तुतः मैं एक ख़ास तरीक़े के इतिहास-निर्माण के ख़िलाफ़ होता हूँ, जिसमें इसे जड़वत बना दिया जाता है।”

— आशीष नंदी

“चुनौती है—व्यवस्था के आभूषण नहीं बनने का, असहमत रहने का।”

— आशीष नंदी

“शत्रु कोई दूर का अजनबी नहीं होता, जिसे मारना आपकी सुरक्षा के लिए ज़रूरी होता है। शत्रु हमेशा वह होता है; जिसने धोखा दिया हो, जो आधा आपके भीतर होता है। वह भूत चढ़ने के समान होता है।”

— आशीष नंदी

“भूतकाल की ओर देखने का इतिहास महज़ एक तरीक़ा है।”

— आशीष नंदी

“मानवीय प्रतिरोध, मानव मूल्यों द्वारा संचालित होते हैं और अपने मूल में संस्कृतियों की सीमाओं से परे होते है।”

— आशीष नंदी

“यदि भविष्य बंद है, तो हमारा वर्तमान भी बंद दिखने लगता है। क्योंकि यदि आप एक ऐसे भविष्य की कामना करते हैं, जहाँ सभी कुछ तय किया हुआ है; सभी कुछ पूर्व-निर्धारित है, तो आप ठीक उसी रास्ते पर चल रहे हैं जो दूसरे देशों ने तय किया हुआ है।”

— आशीष नंदी

“मुझे नहीं लगता है कि सामाजिक ज्ञान के क्षेत्र में कोई भारतीय एक क़दम भी आगे बढ़ा पाएगा; बग़ैर उस ज्ञान खंड का उपयोग किए, जिसे विभित्र समूहों के एक्टिविस्टों ने उत्पन्न किया है।”

— आशीष नंदी

“गांधीवाद गांधी से बहुत व्यापक है।”

— आशीष नंदी

“मनोविज्ञान का मनोविज्ञान है, राजनीति शास्त्र का राजनीति शास्त्र है, समाजशास्त्र का समाजशास्त्र है। यह बहुत चलन में भी है, लेकिन इतिहास का कोई इतिहास नहीं है।”

— आशीष नंदी

“असहमति का स्वर कभी भी पारदर्शी नहीं होने चाहिए।”

— आशीष नंदी

“इतिहास में विस्मरण का कोई स्थान नहीं है।”

— आशीष नंदी

“मनुष्य मात्र ही अंतः विरोधों का पुलिंदा है।”

— आशीष नंदी

“भारत क्रांति की भाषा नहीं बोलता। यह हमेशा निरंतरता की बात करता है।”

— आशीष नंदी

“जब आप कहते है कि खेल रहे हैं; तो खेलिए, लेकिन कम-से-कम खेल को जानिए तो सही।”

— आशीष नंदी

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