“दंड एक प्रकार की औषधि है।”
— अरस्तु
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“दंड एक प्रकार की औषधि है।”
— अरस्तु
“निर्धनता क्रांति और अपराध की जननी है।”
— अरस्तु
“मानव के सभी कार्यों के कारणों में इन सात में से एक या अनेक होते हैं—संयोग, प्रकृति, विवशताएँ, आदत, तर्क, मनोभाव, इच्छा।”
— अरस्तु
“इतिहास का कलात्मक प्रस्तुतीकरण इतिहास के यथातथ्य लेखन की अपेक्षा अधिक वैज्ञानिक और गंभीर प्रयास है क्योंकि साहित्य की कला वस्तुओं के हृदय तक पहुँचती है। जब कि तथ्यपरक वृत्तांत केवल विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है।”
— अरस्तु
“दर्शनशास्त्र वह विज्ञान है जो सत्य पर विचार करता है।”
— अरस्तु
“भ्रातृ-संघर्ष निर्मम होता है।”
— अरस्तु
“मनुष्य की यह विशेषता है कि केवल उसी को अच्छे-बुरे का या उचित-अनुचित आदि का ज्ञान है और ऐसे ज्ञान से युक्त प्राणियों के साहचर्य से ही परिवार और समाज का निर्माण होता है।”
— अरस्तु
“जिस प्रकार शरीर में दृष्टि है, उसी प्रकार आत्मा में तर्क है।”
— अरस्तु
“मित्रता का अर्थ है दो शरीरों में रहती एक आत्मा।”
— अरस्तु
“इतिहास की अपेक्षा काव्य अधिक दार्शनिक और गंभीरतर अभिप्राययुक्त वस्तु है।”
— अरस्तु
“क़ानून मनोविकार से मुक्त तर्क है।”
— अरस्तु
“कोई भी व्यक्ति क्रुद्ध हो सकता है—यह सरल है। लेकिन सही व्यक्ति पर, सही मात्रा में, सही समय पर, सही उद्देश्य के लिए और सही ढंग से क्रुद्ध होना प्रत्येक की सामर्थ्य में नहीं है और न सरल है।”
— अरस्तु
“जनतंत्र का उद्भव मनुष्यों के इस विचार से हुआ कि यदि वे किसी अंश में समान हैं तो वे पूर्ण रूप से समान हैं।”
— अरस्तु
“क्रांतियाँ क्षुद्र बातों के लिए नहीं हैं किंतु क्षुद्र बातों से उद्भूत होती हैं।”
— अरस्तु
“गुप्तचर और सूचक व्यक्ति अत्याचारी शासकों के मुख्य साधन होते हैं। लोगों का ध्यान, दूसरी ओर लगाने तथा अपने को उनमें नेता के रूप में आवश्यक बनाने के लिए युद्ध उनका प्रिय व्यवसाय होता है।”
— अरस्तु
“सभी लोग स्वभाव से ही ज्ञान चाहते हैं।”
— अरस्तु