“सच्ची मित्रता के नियम इस सूत्र में अभिव्यक्त हैं- आने वाले अतिथि का स्वागत करो और जाने वाले अतिथि को जल्दी विदा करो।”
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अलेक्ज़ेंडर पोप — सूक्ति व विचार
अलेक्ज़ेंडर पोप के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। अलेक्ज़ेंडर पोप के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।
“अल्प ज्ञान ख़तरनाक वस्तु है।”
“जैसे-जैसे हम ज्ञान पाते हैं, हम अपने पिताओं को मूर्ख समझते हैं। निस्संदेह हमारे अधिक बुद्धिमान पुत्र हमें भी ऐसा ही समझेंगे।”
“जो भी किसी निर्दोष कृति को देखना चाहता है, वह ऐसी वस्तु की बात सोचता है जो न तो कभी थी, न है और न कभी होगी।”
“ग़लती करना मानवीय है किंतु क्षमा करना दिव्य है।”
“क्रुद्ध होने का अर्थ है दूसरों की ग़लतियों का स्वयं से प्रतिशोध लेना।”
“भूल करना मानवीय है, क्षमा करना दैवी है।”
“अनुचित प्रशंसा प्रच्छन्न अपकीर्ति ही है।”
“ईमानदार मनुष्य ईश्वर की सर्वोत्तम रचना है।”
“मूर्ख वहाँ दौड़कर जाते हैं जहाँ देवदूत चलने में भय खाते हैं।”