“किसी प्रगतिशील जाति के जीवन में सजीव शक्ति बने रहने के लिए महाकाव्य को मंद गति से परिवर्तनशील ग्रंथ होना ही चाहिए। परिशोधन और विस्तार तो इस बात के बाह्य संकेत मात्र हैं कि यह प्रेरणा देने और मार्गदर्शन करने वाला ग्रंथ रहा है, न कि पुस्तकों की धूल-धूसरित अलमारी में पड़ा अप्रुक्त तथा विस्मृत ग्रंथ।”
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विष्णु सीताराम सुकथंकर — सूक्ति व विचार
विष्णु सीताराम सुकथंकर के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। विष्णु सीताराम सुकथंकर के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।
“भारतीय शास्त्रकारों के अनुसार धर्म और नीति की अत्यंत युक्तियुक्त और पूर्ण व्याख्या को महाभारत ग्रंथ प्रस्तुत करता है।”
“हमारा अतीत ही स्वयं को बढ़ाकर वर्तमान बन गया है। हम अतीत हैं, मेरा आशय वास्तविक हम से हैं।”