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स्वदेश दीपक — सूक्ति व विचार

स्वदेश दीपक के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। स्वदेश दीपक के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“फूल हमेशा चुपचाप सूखते हैं।”

— स्वदेश दीपक

“भय का राज्य पल भर में फैल जाता है।”

— स्वदेश दीपक

“औरत जब लड़की में बदल जाए तो बिल्कुल चुप रहो। थक जाए, चुप हो जाए, तो मर्दों का बनाया सबसे झूठा वाक्य बोलो, आप तो ग़ुस्से में और सुंदर हो जाती हैं।”

— स्वदेश दीपक

“सही कवि भविष्य में देख सकते हैं।”

— स्वदेश दीपक

“पुरुष जब बिस्तर में बेकार हो जाए, बेरोज़गार हो जाए, बीमार हो जाए तो पत्नी को सारे सच्चे-झूठे झगड़े याद आने लगते हैं। तब वह आततायी बन जाती है। उसके सर्पीले दाँत बाहर निकल आते हैं।”

— स्वदेश दीपक

“उस भाषा के साहित्य का दुर्भाग्य तय है, जहाँ आलोचक महान् हों, कवि नहीं।”

— स्वदेश दीपक

“सुंदर औरत नादिरशाही होती है। एक-एक करके सब कुछ लूटती है।”

— स्वदेश दीपक

“एक रमणीय स्त्री का सारा इतिहास प्रेम का इतिहास होता है।”

— स्वदेश दीपक

“कुछ दुख उम्र के साथ समझे जाते हैं।”

— स्वदेश दीपक

“नाटक में शब्दों से मोह हो जाता है। यह फ़ालतू का मोह जानलेवा हो जाता है। अभिनेता के लिए भी, निर्देशक के लिए भी, यह बात मुझे रंजीत कपूर ने बताई थी।”

— स्वदेश दीपक

“मेरे पास जूते हैं, मुझे मेरे पैर लौटा दो।”

— स्वदेश दीपक

“आत्म के दुःख कभी नहीं बाँटे जा सकते।”

— स्वदेश दीपक

“तानाशाह प्रेमिका एक प्रेमी से बहुत जल्द उकता जाती है। पालतू बनाने और निस्तेज करने के लिए उसे नया पुरुष चाहिए।”

— स्वदेश दीपक

“अपने अनुभव से हासिल किया ज्ञान है कि डाॅक्टर और माशूक़ कभी नहीं बदलने चाहिए। आप फ़ालतू सवालों से बच जाते हैं।”

— स्वदेश दीपक

“वृद्धों और पागलों पर कोई दया नहीं करता।”

— स्वदेश दीपक

“बच्चे झट से सत्य के आस-पास पहुँच जाते हैं।”

— स्वदेश दीपक

“प्रेम खिड़की से अंदर आता है, दरवाज़े से बाहर चला जाता है।”

— स्वदेश दीपक

“एक विशुद्ध कवि जब सहवास कराता है तो ‘निराला’ हो जाता है। ‘जुही की कली’ और ‘राम की शक्ति-पूजा’। एक महान् कवि सहवास कराता है तो मैथिलीशरण गुप्त हो जाता है। राष्ट्रकवि हमेशा अप्रामाणिक होते हैं।”

— स्वदेश दीपक

“एक औरत बहुत सुंदर हो तो उससे प्रणय-याचना करनी चाहिए।”

— स्वदेश दीपक

“औरत एक छोटा-सा सुख तो देती है, लेकिन दुख बहुत लंबा देती है। प्रभुजी का बनाया विनाशकारी जीव। उसका घातक सौंदर्य पहले हमें बाँध लेता है, फिर सर्वनाश कर देता है।”

— स्वदेश दीपक

“एक बहुत ख़ूबसूरत औरत निर्दयी शक्तियों की मल्लिका होती है।”

— स्वदेश दीपक

“जो आयु को चैलेंज करेगा, आस्कर वाइल्ड की 'पिक्चर ऑफ डोरियन ग्रे' बन जाएगा।”

— स्वदेश दीपक

“दूसरों द्वारा किए गए अपमान का बदला हम अपने से कमज़ोर से लेते हैं।”

— स्वदेश दीपक

“प्रेम और युद्ध के तरीक़े एक जैसे। जो हारे, वह युद्धबंदी।”

— स्वदेश दीपक

“लेखकों के महान् होने का निणर्य भविष्य करता है।”

— स्वदेश दीपक

“सुंदर औरत कभी सलाह नहीं माँगती, बर्बाद करती है, नहीं तो हो जाती है।”

— स्वदेश दीपक

“आग हर शहर में जला सकती है। यह आग का धर्म है।”

— स्वदेश दीपक

“कवियों को आलोचकों और वेश्याओं ने इतना बरबाद नहीं किया, जितना उनकी बीवियों ने।”

— स्वदेश दीपक

“अपनी भाषा हमें ताक़त देती है।”

— स्वदेश दीपक

“सत्य कभी भी दयावान नहीं होता। हम कहाँ चुन सकते हैं अपना भाग्य।”

— स्वदेश दीपक

“प्यार के दिनों में हम शरीर से सुगंध में बदल जाते हैं।”

— स्वदेश दीपक

“सौंदर्य से आँखें पराई हो जाती हैं और तब प्राप्ति-लालसा बढ़ जाती है।”

— स्वदेश दीपक

“जब हम प्यार कर रहे होते हैं तो मूर्ख होते हैं।”

— स्वदेश दीपक

“कायर पिता संतान को अच्छे नहीं लगते।”

— स्वदेश दीपक

“हिंदी के हैड हमेशा कवि-आलोचक होते हैं।”

— स्वदेश दीपक

“एक छोटा-सा वाक्य जो जीवन के नब्बे प्रतिशत छोटे-छोटे निजी अवसाद दूर कर देता है—'आय हम सॉरी।'”

— स्वदेश दीपक

“सच हथेली पर उग आया अंगारा होता है।”

— स्वदेश दीपक

“कविता का अच्छा होना ही काफ़ी नहीं, सवाल यह है कि कविता कहीं जाती भी है।”

— स्वदेश दीपक

“मंच-संचालक बन जाने से कोई मूर्ख विद्वान नहीं बन जाता।”

— स्वदेश दीपक

“भीड़ में जब नया आदमी शामिल हो तो पहले से खड़े लोगों को वह बुरा लगता है।”

— स्वदेश दीपक

“दुख एकदम मज़बूत भी बनाता है, अपने प्रति क्रुअल भी।”

— स्वदेश दीपक

“शब्दों की शादी करते समय चौकन्ना रहना चाहिए।”

— स्वदेश दीपक

“शिकार करना दिमाग़ी खेल है, सिर्फ़ ताक़त नहीं।”

— स्वदेश दीपक

“चीता अपनी जीवनधारा कभी नहीं बदलता।”

— स्वदेश दीपक

“ख़ूबसूरत औरतों को चापलूस और चमचा मर्दों की आदत हो जाती है।”

— स्वदेश दीपक

“परजीवी हमेशा बहुत सख़्तजान होते हैं।”

— स्वदेश दीपक

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