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सियारामशरण गुप्त — सूक्ति व विचार

सियारामशरण गुप्त के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। सियारामशरण गुप्त के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“मन में जब दुःख देवता का आगमन हो, उस समय उसका सबसे बड़ा आदर यही हो सकता है कि उसे पाकर मनुष्य अपना खान-पान तक भूल जाय। दुःख के बीच में ऐसा आनंद न हो तो उसे ग्रहण ही कौन करे?”

— सियारामशरण गुप्त

“पीड़ा हठीले बच्चे की तरह है। समझा-बुझा कर किसी तरह थोड़ी देर के लिए वह वश में कर ली जा सकती है।”

— सियारामशरण गुप्त

“पाप केवल इसलिए बुरा नहीं है कि उससे अपने आपको नरक मिलता है, बुरा वह इसलिए है कि उसकी दुर्गंध से दूसरे का दम भी बिना घुटे नहीं रहता।”

— सियारामशरण गुप्त

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