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सरदार पूर्ण सिंह — सूक्ति व विचार

सरदार पूर्ण सिंह के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। सरदार पूर्ण सिंह के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“हमारे यहाँ के मज़दूर, चित्रकार तथा लकड़ी और पत्थर पर काम करने वाले भूखों मरते हैं तब हमारे मंदिरों की मूर्तियाँ कैसे सुंदर हो सकती हैं?”

— सरदार पूर्ण सिंह

“सच्चा साधु धर्म को गौरव देता है, धर्म किसी को गौरवान्वित नहीं करता।”

— सरदार पूर्ण सिंह

“मनुष्य और मनुष्य की मज़दूरी का तिरस्कार करना नास्तिकता है।”

— सरदार पूर्ण सिंह

“वही सच्चा कवि है जो दिव्य सौंदर्य के अनुभव में लीन हो जाए।”

— सरदार पूर्ण सिंह

“अन्न पैदा करने में किसान भी ब्रह्मा के समान है। खेती उसके ईश्वरीय प्रेम का केंद्र है। उसका सारा जीवन पत्ते-पत्ते में, फूल-फूल में बिखर रहा है।”

— सरदार पूर्ण सिंह

“सत्वगुण के समुद्र में जिनका अंतःकरण निमग्न हो गया वही महात्मा साधु और वीर हैं।”

— सरदार पूर्ण सिंह

“अख़बार लिखने वाले मामूली सिक्के के मनुष्य होते हैं।”

— सरदार पूर्ण सिंह

“जो आँख हर आँख में अपने ही प्यारे को देखती है, वह कला के पैमानों के कारागार में कैसे बंद हो सकती है?”

— सरदार पूर्ण सिंह

“जब हम मनुष्य हो जाएँगे तब तो तलवार भी, ढाल भी, जप भी, तप भी, ब्रह्मचर्य भी, वैराग्य भी सबके सब हमारे हाथ के कंकणों की तरह शोभायभान होंगे, और गुणकारक होंगे।”

— सरदार पूर्ण सिंह

“जब तक देश में पवित्रता नहीं आती तब तक बल नहीं आता।”

— सरदार पूर्ण सिंह

“निकम्मे बैठे हुए चिंतन करते रहना, अथवा बिना काम किए शुद्ध विचार का दावा करना मानो सोते-सोते खर्राटें मारना है।”

— सरदार पूर्ण सिंह

“हमें अपना रास्ता अपने जीवन की कुदाली की एक-एक चोट से रात-दिन बनाना पड़ेगा और उसी पर चलना भी पड़ेगा।”

— सरदार पूर्ण सिंह

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