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रघुवीर चौधरी — सूक्ति व विचार

रघुवीर चौधरी के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। रघुवीर चौधरी के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“एक स्त्री पूज्य होने के बजाय स्वतंत्र रहना ज़्यादा पसंद करती है, लेकिन उसे यह कौन पूछेगा?”

— रघुवीर चौधरी

“प्रेम के भ्रम में भी प्रेम की आंशिक स्वीकृति होती है। शायद प्रेम की समग्रता को स्वीकार करना बहुत दुर्लभ है।”

— रघुवीर चौधरी

“पुरुष को स्त्री को जानने में कोई दिलचस्पी नहीं थी, इसलिए उसने उसे परम रहस्य कहकर पुरस्कृत किया; लेकिन वास्तव में घमंड के बहाने उसके अधिकार की उपेक्षा की गई।”

— रघुवीर चौधरी

“स्वतंत्र होने की कोशिश में साहस निहित है। साहसिक कार्य आत्म-सम्मान का पोषण करता है और आत्म-सम्मान किसी भी जोखिम को लेने की इच्छा पैदा करता है। तो क्या अकेले रहने का साहस करने में जोखिम है? शायद, साहस का मतलब ही जोखिम है?”

— रघुवीर चौधरी

“प्रेम एक घटना में वैसा नहीं होता जैसा कि दूसरी घटना में होता है। समान प्रतीत होने वाली अन्य घटनाओं का अनुभव भी भिन्न होता है।”

— रघुवीर चौधरी

“पृथ्वी अपनी गणना में अद्वितीय है। इसकी सुंदरता को केवल पैदल यात्री ही महसूस कर सकता”

— रघुवीर चौधरी

“आँखें एक जैसी होने पर भी देखने-देखने में फ़र्क़ होता है।”

— रघुवीर चौधरी

“प्रेम नाम का कोई शाश्वत सूत्र नहीं है जो जीवन भर अपनी उपस्थिति का यक़ीन दिलाता रहे।”

— रघुवीर चौधरी

“यदि शंकाओं का उचित समाधान नहीं किया गया तो वे विनाश की ओर अग्रसर करती हैं।”

— रघुवीर चौधरी

“मौन निकटता की भावना लाता है। जैसे ही बात खुलती है, तीसरी उपस्थिति की मानो चेतावनी आती है।”

— रघुवीर चौधरी

“चेहरे को चेहरा कहने की अपेक्षा उसे अनंत सौंदर्य का दर्शन कहना सत्य के अधिक निकट होगा।”

— रघुवीर चौधरी

“यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि दूसरों में रुचि का कारण मनुष्य की स्वयं में रुचि है। यह संसार स्वार्थ से जुड़ा है। यह ठोस वास्तविकता है लेकिन मनुष्य केवल वास्तविकता के सहारे नहीं जी सकता। आकाश के बिना इसका काम नहीं चल सकता। भले ही कोई आकाश को शून्य स्थान कहे…”

— रघुवीर चौधरी

“किसी के शब्दों की लय में झूलना एक सुखद, लेकिन अचेतन निर्भरता हो सकती है।”

— रघुवीर चौधरी

“त्यागने की संतुष्टि और अनुभव की संतुष्टि में बहुत बड़ा अंतर है।”

— रघुवीर चौधरी

“जो वास्तविक लगता है उसे सत् नहीं माना जा सकता, वास्तविकता और सत् के बीच बहुत अंतर है।”

— रघुवीर चौधरी

“मानव-हृदय की तरह, रेगिस्तान सागर बन जाता है और सागर रेगिस्तान बन जाता है।”

— रघुवीर चौधरी

“स्त्री-हृदय के मर्मकोष को जाने बिना ही बहुत कुछ कहा गया है।”

— रघुवीर चौधरी

“क्या जिसे हम क्षितिज कहते हैं, वह वास्तविकता है? या हम ऐसा कह रहे हैं? लेकिन हम अनंत को नहीं देख सकते, इसलिए हम ऐसी काल्पनिक सीमाओं को स्वीकार कर लेते हैं।”

— रघुवीर चौधरी

“जितना आप प्रकट होते हैं और जहाँ आप प्रकट होते हैं, अपने आप पर उतना ही और केवल वहीं विश्वास करें। जो देखा नहीं जा सकता, फिर भी अस्तित्व में है, सर्वत्र है और शाश्वत है। आख़िरकार हम वही हैं।”

— रघुवीर चौधरी

“मनुष्य की उपस्थिति में रेगिस्तान आभासी हो जाता है।”

— रघुवीर चौधरी

“समुद्र विशाल एवं अखंड है। जो ऊपर नहीं दिखता, वह भीतर है।”

— रघुवीर चौधरी

“मनुष्य अकेला नहीं है, वह समग्र से जुड़ा हुआ है, अनेकों पर उसकी निर्भरता अपरिहार्य है।”

— रघुवीर चौधरी

“शब्दों के ब्रह्मांड में सोलह-सोलह सूर्य प्रज्वलित रहे हैं। वहाँ कुछ भी बाधित नहीं है, सब कुछ पूर्ण है, प्रचुर है।”

— रघुवीर चौधरी

“कई बार बातों से भ्रम पैदा हो जाता है।”

— रघुवीर चौधरी

“अनिर्वचनीय है वह तो अखंड है। कहे जाने पर तो वह गल जाएगा।”

— रघुवीर चौधरी

“सिर्फ़ विश्वास करने से काम नहीं चलता। आश्वस्त भी होना चाहिए—अनुभव से।”

— रघुवीर चौधरी

“पूर्वकल्पित धारणाओं से किसी को समझना सही नहीं है। सच्ची पहचान उसके आचरण से ही मिल सकती है। लेकिन व्यवहार प्रासंगिक है। क्या यह व्यक्तित्व के सुसंगत पहलुओं का परिचय दे सकता है? अन्यथा व्यवहार भी भ्रामक है। धारणा भी भ्रामक है। अनुभव भी भ्रामक है… तो सच क्या है? लेकिन सत्य भी धारणा ही है, है ना? बिना धारणा के मैं दौड़ नहीं सकता।”

— रघुवीर चौधरी

“इस संसार में मनुष्य चैन की नींद नहीं सो सकता। कई बार पलकों तक आई नींद भी गायब हो जाती है।”

— रघुवीर चौधरी

“भय का अनुभव केवल उन्हें ही होगा जिनको विश्वास नहीं है।”

— रघुवीर चौधरी

“कुछ भी आकस्मिक नहीं है, सब कुछ क्रमिक है।”

— रघुवीर चौधरी

“प्रत्येक क्षण के पीछे पूरे अतीत का भार है।”

— रघुवीर चौधरी

“जो रहस्य से घिरा होता है, वह अधिक सुंदर दिखता है।”

— रघुवीर चौधरी

“स्त्रियों की सुरक्षा का विचार अभी भी पुरुषों के मन से नहीं गया है। यह आपकी स्त्री दयालुता और सुरक्षा में एक इच्छुक आधिपत्य का सुझाव देता है।”

— रघुवीर चौधरी

“व्यंग्य ख़त्म होते ही शब्द खिलौना बन जाता है।”

— रघुवीर चौधरी

“समय न तो माँगा जा सकता है और न ही दिया जा सकता है। यह निराकार, रंगहीन है। यह एक बिंदु से प्रारंभ होकर किसी बिंदु पर समाप्त नहीं हो सकता। वही अमरत्व है। इसे इस तरह बदलना हमारे हाथ में नहीं है। हम इससे तटस्थ रह सकते हैं और केवल वही विनिमय कर सकते हैं जो हमारे अधिकार में है”

— रघुवीर चौधरी

“ज्ञानी को कहना नहीं पड़ता, लेकिन ज्ञानी को ही कहने की इच्छा होती है।”

— रघुवीर चौधरी

“रोकर दुख कम करना कायरों का काम है। दुख हमारी रीढ़ है।”

— रघुवीर चौधरी

“शून्य स्थान में ही स्थिरता संभव है।”

— रघुवीर चौधरी

“समय एक ऐसा कारक है जो बिना उत्तर के भी आगे जाकर किसी प्रश्न की तीव्रता को कम कर सकता है।”

— रघुवीर चौधरी

“स्मरण का संबंध अंधकार से अधिक है।”

— रघुवीर चौधरी

“यहाँ सच बोलना सबसे बड़ा अनादर है—आक्रामक प्रवृत्ति है।”

— रघुवीर चौधरी

“सवाल सिर्फ़ अतीत को मिटाने का ही है।”

— रघुवीर चौधरी

“न बोलने से भी राहत मिलती है और मौन से भी बचा सकता है। बेशक, चेहरे की रेखाओं में इसे न दिखने देकर ख़ामोशी को पूरी तरह ख़ामोश नहीं रखा जा सकता।”

— रघुवीर चौधरी

“जो समझता है कि वह मौन है। उसे कुछ बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है।”

— रघुवीर चौधरी

“जीए बिना जो कुछ भी समझा जाता है, वह अधूरा है।”

— रघुवीर चौधरी

“‘यह’ और ‘वह’ एक ही हैं। जो कुछ भी विविध है, वह उसी का रूपांतरण है।”

— रघुवीर चौधरी

“भविष्य कभी भी किसी के लिए पारदर्शी नहीं होता। उसे हमारी ज़िद से कोई सहानुभूति नहीं है। कहने का मतलब यह नहीं है कि यह अनुचित है, लेकिन यह अकल्पनीय है।”

— रघुवीर चौधरी

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