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रघुनाथ चौधरी — सूक्ति व विचार

रघुनाथ चौधरी के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। रघुनाथ चौधरी के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“स्त्रियाँ कभी क्रूरता पर नहीं रोतीं। वे दूसरों के दिए दर्द पर नहीं रोतीं। रोने के लिए उनका अपना दर्द ही काफ़ी होता है।”

— रघुनाथ चौधरी

“जानवर इंसानों जितने बुद्धिमान नहीं होते, इसलिए उन्होंने छिपने की कला नहीं सीखी है। लेकिन मनुष्य में और उनमें बुद्धि को छोड़कर बाक़ी सभी चीज़ें समान स्तर की होती हैं। उन्होंने अपनी कुटिल बुद्धि से वितरण की व्यवस्था बनाकर अपने पशुवत कर्मों को छुपाने के लिए सुरक्षित अंधकार पैदा कर लिया है।”

— रघुनाथ चौधरी

“पहली नज़र को प्रेम मानकर समर्पण कर देना भी पागलपन है।”

— रघुनाथ चौधरी

“संतोष की भाषा धीमी होती है, क्योंकि वह शब्दों और मौन दोनों में व्यक्त होती है।”

— रघुनाथ चौधरी

“शांति और मौन का अर्थ है—शोर का अभाव, यानी वास्तव में एक बेचैन करने वाली शांति।”

— रघुनाथ चौधरी

“मनुष्य के लालच और आत्मघात का ज़हर धरती के केंद्र में काफ़ी जमा हो चुका है।”

— रघुनाथ चौधरी

“एक ज़िंदगी किनारे की भी होती है, जो बह जाने वाले को भीगी आँखों से देखती है।”

— रघुनाथ चौधरी

“कुछ भी इतना मधुर नहीं होना चाहिए कि सुनते ही नींद आ जाए और इतना प्रेरक भी नहीं कि समझने पर वैराग्य आ जाए।”

— रघुनाथ चौधरी

“स्थिरता और जड़ता के बीच भी कोई स्थिति होनी चाहिए।”

— रघुनाथ चौधरी

“हुए बिना या हो जाने के अलावा अब हमसे कुछ हो भी नहीं सकता है।”

— रघुनाथ चौधरी

“मैं प्रेम का भिखारी, इस विश्व भंडार में हृदय समर्पण को खोज रहा था। परंतु समुद्र मंथन में हालाहल विष का उद्भव हुआ, अमृत का संधान नहीं मिला।”

— रघुनाथ चौधरी

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