“मैं आकाश के आलोक में तुम्हें पकड़ नहीं पाती, पकड़ नहीं पाती, मन में मिलाकर अपना नहीं पाती। तुमको पकड़ नहीं पाती, पकड़ नहीं पाती, चाहे जितना भी प्यार करूँ।”
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प्रियंवदा देवी — सूक्ति व विचार
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