“सच्चा धन तो है बस धर्म, जो हिंदू का जीवन मर्म।”
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मैथिलीशरण गुप्त — सूक्ति व विचार
मैथिलीशरण गुप्त के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। मैथिलीशरण गुप्त के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।
“धन-रूपी फल का परिश्रम ही मूल है।”
“दोषदर्शी होता है द्वेष।”
“है मरण से भी बुरा अपमान होना लोक में।”
“अभिव्यक्ति की कुशल शक्ति ही तो कला।”
“युद्ध परिसीमा है परत्व के विकास की।”
“जो है आत्मविश्वासी वही तो अस्तिवादी है।”
“सिद्ध एक पुरुषार्थ हमारी भुक्ति-मुक्ति का मंत्र।”
“गिरना क्या उसका उठा ही नहीं जो कभी?”
“शिष्ट है वही जो कर्म कौशल विशिष्ट है।”
“बाण से भी वचन का होता भयंकर घाव है!”
“हा! अर्थ, तेरे अर्थ हम करते अनेक अनर्थ हैं।”