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कृपाराम खिड़िया — सूक्ति व विचार

कृपाराम खिड़िया के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। कृपाराम खिड़िया के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“जिस गाँव में गुण-अवगुण को सुनने व समझने वाला कोई नहीं है और जहाँ अराजकता फैली हुई है, हे राजिया! वहाँ रहना कठिन है।”

— कृपाराम खिड़िया

“मुख से मीठा बोलते हैं पर हृदय से बुराई करते रहते हैं। हे राजिया! ऐसे लोगों से कभी संपर्क नहीं रखना चाहिए।”

— कृपाराम खिड़िया

“हे राजिया! यदि सिंह मर भी जाए तो भी वह मिट्टी या घास नहीं खाता।”

— कृपाराम खिड़िया

“कस्तूरी बहुत काली और करूप होती है पर काँटे पर तोली जाती है। परंतु हे राजिया! शक्कर बहुत सुंदर होने पर भी पत्थरों से तोली जाती है।”

— कृपाराम खिड़िया

“गंभीर हाथी मदमस्त होकर अपनी मौज से चला जा रहा है। हे राजिया! कुत्ते क्यों रो-रोकर भौंकते है?”

— कृपाराम खिड़िया

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