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किशनचंद 'बेवस' — सूक्ति व विचार

किशनचंद 'बेवस' के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। किशनचंद 'बेवस' के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“जब सच्चाई पर नवीनता का रंग चढ़ता है, उस समय मानो सोने की अंगूठी में कोई हीरा जड़ देता है। कला वही है जो नमूने में नई गठन गढ़ दे, परंतु वाणी में भी प्राचीनता का पाठ पढ़ाए।”

— किशनचंद 'बेवस'

“मेरा घर भी वहीं है जहाँ पीड़ा का निवास है। जहाँ-जहाँ दुःख विद्यमान है वहाँ-वहाँ मैं विचरता हूँ।”

— किशनचंद 'बेवस'

“तुम्हारे इन अट्टहासों के कारण हज़ारों आँखें आँसुओं से भरी हुई हैं।”

— किशनचंद 'बेवस'

“तंग मज़हबों में सीमित न हो जाओ। राष्ट्रीयता को स्थान दो। भ्रातृत्व, मानवता तथा आध्यात्मिकता को स्थान दो। द्वैत-भावना की मलिन दृष्टि को त्याग दो- तुम भी रहो, मैं भी रहूँ।”

— किशनचंद 'बेवस'

“यदि तुम्हारे पास धन हैं, तो निर्धनों को बाँट दो। यदि धन पर्याप्त नही है तो मन की भेंट दो। यदि मन ठोक नहीं है तो तन अर्पित करो। यदि तन भी स्वस्थ नहीं है तो मीठे वचन ही बोलो। परंतु तुम्हें कुछ न कुछ देना ही है और परोपकार के लिए अवश्य ही स्वयं को न्यौछावर करना है।”

— किशनचंद 'बेवस'

“हे एकता के देवता! मैं तुम्हारा मंदिर कहाँ पाऊँ? वह हृदय कहाँ है जिसके अंदर एकता का प्रकाश है?”

— किशनचंद 'बेवस'

“आज वही सारहीन है जिस पर कल आश्चर्य प्रकट किया जा रहा था। जो कल तक ज्ञान समझा जाता था, आज वही अज्ञान माना जा रहा है। कल शायद वह दोषी माना जाएगा, जिसे आज ज्ञान प्राप्त है। वह वस्तु ही कहाँ है जिसमें परिवर्तशीलता न हो?”

— किशनचंद 'बेवस'

“सारे विश्व में तुम्हारी कठोरता और मेरी विश्वासपात्रता प्रसिद्ध है। परंतु वास्तव में विश्वासपात्रता तुम्हारी है। और कठोरता मेरी।”

— किशनचंद 'बेवस'

“यह सारा विश्व ही भगवान् का मंदिर है जिसमें प्रभु प्रत्येक के हृदय में विराजमान है। ओ स्रष्टा! प्रत्येक शरीर रूपी मंदिर बना हुआ है।”

— किशनचंद 'बेवस'

“मैं बातें बड़ी सुंदर-सुंदर करता हूँ लेकिन मेरा आचार तथ्यरहित है।”

— किशनचंद 'बेवस'

“कभी कुछ न माँगो क्योंकि इस माँग के अंदर ही निकृष्टता के चिह्न हैं। अतः तृष्णा और वासना का नाश कर दो।”

— किशनचंद 'बेवस'

“तुम करोड़ों मूक भारतीयों की वाणी हो। तुम्हारी ख़ामोशी तेज़ तूफ़ान का आगमन है। तुम्हारी मुस्कुराहट में पीड़ित हृदयों की कथा समाई हुई है। तुम्हारी ललाट से सत्य के चिह्न प्रकटित हैं।”

— किशनचंद 'बेवस'

“अमूल्य हीरे की कनी से वह रक्त-बिंदु अधिक मूल्यवान हैं जो प्रसन्नतापूर्वक दूसरे के पसीने के लिए गिराया जाता है |”

— किशनचंद 'बेवस'

“नितांत बेबस अथवा निरुपाय के लिए ही प्रकृति का सहायक हाथ पहुँचता है।”

— किशनचंद 'बेवस'

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