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ज्ञानरंजन — सूक्ति व विचार

ज्ञानरंजन के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। ज्ञानरंजन के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“आकाश हम छू रहे हैं, ज़मीन खो रहे हैं।”

— ज्ञानरंजन

“...लिखते समय जितना भी अकेलापन हो, वह काफ़ी अकेलापन नहीं है, कितनी ही ख़ामोशी हो वह पर्याप्त ख़ामोशी नहीं है, कितनी ही रात हो वह काफ़ी रात नहीं है।”

— ज्ञानरंजन

“आप किसी के प्रभाव में कुछ दिन तक तो रह सकते हैं, लेकिन आजीवन नहीं रह सकते।”

— ज्ञानरंजन

“सच्चाई की कानाफूसी नहीं होती।”

— ज्ञानरंजन

“हमें मार्ग पर चलना भी है, मार्ग बनाना भी है।”

— ज्ञानरंजन

“लिखते समय सारा समय ही बहुत कम है, क्योंकि सड़कें अंतहीन लंबी हैं और रास्ते से कभी भी भटका जा सकता है।”

— ज्ञानरंजन

“कभी ऐसा दिन भी होता है और ऐसी ऋतु जब आकाश पर सुबह तक चाँद एक वाटरमार्क की तरह उपस्थित रहता है और दूसरी तरफ़ सूर्योदय भी हो रहा होता है। मेरे जीवन का प्रारंभ कुछ ऐसा ही था।”

— ज्ञानरंजन

“पुरस्कार के पीछे समाज होना चाहिए।”

— ज्ञानरंजन

“एक हद तक प्रकाशित होना ही पुरस्कृत होना है।”

— ज्ञानरंजन

“साहित्य में जो मुद्दा राजनीति के रास्ते से आता है, वह बहुत दिनों तक या स्थायी रूप से नहीं टिक पाता।”

— ज्ञानरंजन

“सूची कोई भी बनाए, कभी भी बनाए, सूचियाँ हमेशा ख़ारिज की जाती रहेंगी; वे विश्वसनीयता पैदा नहीं कर सकती—क्योंकि हर संपादक, आलोचक के जेब में एक सूची है।”

— ज्ञानरंजन

“कहानी को अच्छा गद्य चाहिए।”

— ज्ञानरंजन

“लेखक का मार्ग अपनी सुदीर्घ परंपरा और विचार से निर्धारित होगा, वह राजनैतिक दलों की करवटों से नहीं बनेगा।”

— ज्ञानरंजन

“बाज़ार वह जगह है जहाँ स्वागत किया जाता है, अंगीकृत किया जाता है, सजाया जाता है, बेचा जाता है और फ़ालतू भी कर दिया जाता है।”

— ज्ञानरंजन

“लेखक का जीवन का गृहस्थ के जीवन से टूट-टूटकर चलता है।”

— ज्ञानरंजन

“रचनाकारों अपने समाज में धँसने की ज़रूरत है।”

— ज्ञानरंजन

“अगर हमारे पास मुठभेड़ के अपने विषय नहीं होंगे और हम विरोधियों, शत्रुओं से ही संघर्ष के विषय लेते रहेंगे तो यह एक झगड़ालू और निस्तेज जीवन होगा।”

— ज्ञानरंजन

“शमशेर के नेत्र मैं भूलता नहीं, वे चलती हुई नावों की तरह हैं।”

— ज्ञानरंजन

“लिखने का मतलब है अपने को अतिरेक में दिखाना।”

— ज्ञानरंजन

“कुछ हमारे नवोदितों को लगता है कि बड़े शहरों में मौलिकता मिलेगी—मौलिकता युगावतारों के लिए है।”

— ज्ञानरंजन

“सूचनाएँ हमारे नरक की ख़बर देती हैं।”

— ज्ञानरंजन

“पुरस्कार वही अच्छे होते हैं, जो दूर और दुर्लभ लगते हैं।”

— ज्ञानरंजन

“पुरस्कार को भी अपनी प्रतिष्ठा बनानी होती है।”

— ज्ञानरंजन

“हमको अपनी विधा पर मास्टरी करनी चाहिए।”

— ज्ञानरंजन

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