“तुम्हारा हर काम और हर खेल मग़रिबी (पश्चिमी) है, तुम हारे तो क्या और जीते तो क्या! बल्कि दुःख तो ये है कि तुम उनकी नक़ल उतारने में कभी-कभी जीत भी जाते हो।”
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जौन एलिया — सूक्ति व विचार
जौन एलिया के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। जौन एलिया के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।
“एक शख़्स अपनी ख़ुशी के लिए दूसरे का दिल दुखाता है।”
“मैं भी बहुत अजीब हूँ, इतना अजीब हूँ कि बस, ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं।”
“इस समाज में हमारी दाहिनी तरफ़ भी झूठ है और बाईं तरफ़ भी। सामने भी और पीछे भी, झूठ ही झूठ है जिसके सबब ये झल्लाहटें हैं और खोट ही खोट है जिसके बाइस ये झुँझलाहटें हैं।”
“इस समाज में जो आदमी बुरा नहीं है वो बेवक़ूफ़ है।”
“एक इंसान दूसरे इंसान से मायूस हो सकता है, लेकिन इंसानियत से मायूस नहीं होना चाहिए।”
“हमें रोज़-मर्रा की ज़िंदगी में न किसी फ़लसफी की ज़रूरत पेश आती है, न किसी शाइर की… फिर समाज उनकी हैसियत को भला किसलिए तस्लीम करे।”
“जिस शख़्स से बुराई सरज़द (घटित) होती है, वो अपनी बुराई में तिहाई का ज़िम्मेदार है, बाक़ी की ज़िम्मेदारी उस समाज पर है जिसकी बुनियाद इस पर रखी गई है।”
“मुशायरा एक ऐसा ख़तरनाक हंगामा है जिसमें शाइर की इज़्ज़त लम्हा-लम्हा ख़तरे की ज़द में रहती है।”
“आज हर वो शख़्स दानिशवर, शाइर और नक़्क़ाद होने का मुद्दई है; जो समाज का सबसे नालायक़ फ़र्द (व्यक्ति) हो।”
“आज हर बेमाया मीर-ओ-ग़ालिब बना हुआ है।”
“इस समाज में तुम अगर ये सुनो कि क़ातिल मक़्तूल (क़त्ल होने वाला) का दोस्त नहीं था तो इस पर तअ’ज्जुब करो।”
“हम जिस समाज में रहते हैं, ख़ुदग़र्ज़ी और ख़ुदमुरादी उसका दस्तूर और हक़-तलफ़ी उसका रिवाज है।”
“जो शख़्स बोलना नहीं जानता, उसे बोलना सिखाओ, लेकिन इस तवक़्क़ो (आशा) के साथ कि जब वह पहली बार रवानी से बोलेगा तो तुम्हें गाली देगा। जिसे लिखना नहीं आता, उसे लिखने की मश्क़ (अभ्यास) कराओ, पर नफ़्स (ख़ुद) की इस आमादगी (रज़ामंदी) के साथ कि जब वो लिखना सीख लेगा तो सबसे पहले तुम्हारे क़त्ल के महज़र (अधिपत्र) पर दस्तख़त करेगा।”
“हर पेशा कुछ न कुछ रियाज़ चाहता है।”
“फ़लसफ़ा और अदब समाज से अपना एहतराम तो करा लेते हैं, मगर उसकी किसी ज़रूरत को पूरा करने के अहल साबित नहीं होते।”