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गंगाधर मेहेर — सूक्ति व विचार

गंगाधर मेहेर के प्रेरित करने वाले विचार, सूक्तियाँ और उद्धरण — हिंदी में। गंगाधर मेहेर के प्रसिद्ध विचार पढ़ें और उन्हें तस्वीर बनाकर WhatsApp, Facebook या Instagram पर साझा करें।

“मेरा शरीर जलकर अवश्य राख होगा और वृक्षों में खाद के रूप में उपयोगी होगा। जब उस वृक्ष की लकड़ी लेकर बढ़ई अपने कौशल से प्रभु के लिए पादुका बनाएगा, उस समय भी (उसमें स्थित) मुझे प्रभु की पद-सेवा का सौभाग्य मिलेगा ही।”

— गंगाधर मेहेर

“साँप काटे हुए आदमी के मुख में नमक देने पर वह उसे मिट्टी बताता है। इसी प्रकार यदि मूर्ख को यह ज्ञान अमृत तुल्य लगे तो हे जीवन! उसे ज्ञान रूपी बूटी घोल कर पिलाओ।”

— गंगाधर मेहेर

“कुसंग से बढ़कर पाप संसार में नहीं है और कुसंगी के साथ रहने के कारण बहुत दुःख झेलना पड़ता है।”

— गंगाधर मेहेर

“जननी का स्नेह, पत्नी का प्रेम, ज्ञानी मित्रों का आलाप और पिता का स्नेह एक-एक झरने के समान जीवन के एक-एक ताप का विनाश कर रहा है।”

— गंगाधर मेहेर

“मधुर के साथ मधुर द्रव्य मिल कर मधुमय बन गया। ऐसा संयोग सौभाग्य से ही मिलता है।”

— गंगाधर मेहेर

“लोग धर्म को मंगलमय कहते हैं परंतु यह कौन जानता है कि 'यम' भी धर्म कहलाता है।”

— गंगाधर मेहेर

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